बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती: लखनऊ में छह दिवसीय ‘जनजातीय गौरव सप्ताह’ का आगाज
बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश सरकार ‘जनजातीय गौरव सप्ताह’ का भव्य आयोजन कर रही है। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 13 से 18 नवंबर तक छह दिवसीय ‘जनजाति भागीदारी उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य महान जनजातीय लोकनायक बिरसा मुंडा के जीवन, योगदान और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि युवा पीढ़ी उनके विचारों से प्रेरित हो सके। यह आयोजन जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं, कला और संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ से मिली जानकारी के अनुसार, समाज कल्याण विभाग और उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान संयुक्त रूप से इस भव्य आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस ‘जनजाति भागीदारी उत्सव’ में देश के विभिन्न राज्यों की जनजातीय लोकनृत्य प्रस्तुतियां, लोकगीत, पारंपरिक शिल्प और व्यंजन प्रदर्शनी जैसे विविध कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त, बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नाटक, रंगोली, चित्रकला प्रतियोगिताएं और जनजातीय खेलकूद का भी आयोजन किया जाएगा। कलाकारों द्वारा एक आकर्षक शोभायात्रा भी निकाली जाएगी, जो जनजातीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शाएगी।
आयोजन की तैयारियों की समीक्षा के लिए समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सोमवार को भागीदारी भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक की। उन्होंने नोडल अधिकारियों को नामित करने और सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री असीम अरुण ने इस बात पर जोर दिया कि यह छह दिवसीय उत्सव जनजातीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और योगदान को व्यापक जनभागीदारी के साथ भव्य तरीके से जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कार्यक्रमों के संचालन में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
इस ‘जनजातीय गौरव सप्ताह’ के तहत, जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर 15 नवंबर को सोनभद्र में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं उपस्थित रहेंगे। मंत्री असीम अरुण ने सोनभद्र में होने वाले इस कार्यक्रम की तैयारियों को भी समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड, अपर मुख्य सचिव एल. वेंकटेश्वर लू और प्रमुख सचिव पर्यटन अमृत अभिजात सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन बिरसा मुंडा के बलिदान और उनके संघर्षों को याद करने के साथ-साथ जनजातीय समाज के गौरव को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
