कानपुर देहात में होली का उत्साह: बुजुर्गों की प्रेरणा से संवरने लगी होलियां
कानपुर देहात में होली के त्योहार के नजदीक आते ही, होलिका दहन स्थलों पर एक नई ऊर्जा का संचार होने लगा है। एक समय था जब होली के लिए हफ्तों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती थीं, लेकिन बदलते समय के साथ युवाओं का उत्साह कम हुआ और अतिक्रमण ने परंपराओं को प्रभावित किया।
परंपरा को जीवित रखने का प्रयास
अब गांवों के बुजुर्ग अपनी युवावस्था के किस्से सुनाकर युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। वे बताते हैं कि कैसे पहले होली के लिए लकड़ियां इकट्ठा करने की होड़ लगी रहती थी और होलिकाएं कई फुट ऊंची बनाई जाती थीं। इन कहानियों का असर दिख रहा है और युवा फिर से होलियों का आकार बढ़ाने में जुट गए हैं।
बदलती रस्में और बुजुर्गों की चिंता
पहले होली पूजन के समय घरों से लकड़ी व उपले लाए जाते थे और महिलाएं गोबर से छोटी होली बनाकर गेहूं-जौ की बालियां भूनती थीं। अब यह रस्म अदायगी मात्र रह गई है। अकबरपुर जैसे क्षेत्रों में नगर पंचायत ने यह जिम्मेदारी संभाली है, लेकिन गांवों में बुजुर्ग इस परंपरा को बचाने के लिए युवाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं।
अतिक्रमण और बढ़ती लागत की चुनौतियां
बुजुर्गों का कहना है कि पहले होलिका दहन स्थलों पर कब्जे का डर नहीं होता था, लेकिन अब अतिक्रमण और आसपास मकान बन जाने से होलिकाएं छोटी होने लगी हैं। साथ ही, महंगी लकड़ियां लाकर होली बढ़ाना भी अब मुश्किल हो गया है। इन चुनौतियों के बावजूद, परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रयास जारी हैं।
