लखनऊ में पशु प्रेमियों ने निकाली ‘पिंजड़ा तोड़’ रैली, सुप्रीम कोर्ट से की पुनर्विचार की अपील | Lucknow animal rights
लखनऊ में रविवार को पशु प्रेमियों ने ‘पिंजड़ा तोड़’ रैली निकालकर सुप्रीम कोर्ट से अपने आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इस प्रदर्शन में सपा संस्थापक स्व. मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता पोलोमी पाविनी शुक्ला और पशु अधिकार कार्यकर्ता अंबिका शुक्ला सहित कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। यह रैली पशुओं के अधिकारों की रक्षा और उनके प्रति बढ़ती क्रूरता पर रोक लगाने की मांग को लेकर निकाली गई थी, जो अब एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा बन चुका है।
ताज होटल के सामने से शुरू हुई यह रैली 1090 चौराहा से चटोरी गली होते हुए रीवर फ्रंट तक गई। इसमें पशु प्रेमियों के साथ-साथ बाइक सवार, गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता और स्कूली बच्चे भी शामिल थे। हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए प्रदर्शनकारी ‘हल्ला बोल, पिंजड़ा तोड़…’ और ‘आवारा नहीं, हमारा है…’ जैसे नारे लगा रहे थे।
आवारा कुत्तों के लिए वैज्ञानिक समाधान की मांग
रैली में शामिल पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में डालने के बजाय एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) को एकमात्र प्रभावी समाधान बताया। एनिमल राइट्स समूह द्वारा ‘इंडिया 4 एनिमल्स’ के सहयोग से आयोजित इस रैली में अंबिका शुक्ला ने चिंता व्यक्त की कि समाज धीरे-धीरे भय और पशु विरोधी मानसिकता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुत्ते स्वभाव से मित्रवत और वफादार होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता पोलोमी पाविनी शुक्ला और प्रतीक यादव ने भी कुत्तों को शेल्टर होम में रखने का विरोध करते हुए उनके बर्थ कंट्रोल पर जोर दिया। गौरी मौलेखी ने लखनऊ के मॉडल को एनिमल बर्थ कंट्रोल का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकार और आम जनता की सहभागिता पर आधारित मॉडल ही इस समस्या से निपटने का सर्वोत्तम तरीका है।
शंकशया बब्बर ने कहा कि कुत्तों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत करना समाज में डर फैलाता है, जिससे लोग उन्हें मारते या भगाते हैं। उन्होंने करुणा और विवेकपूर्ण व्यवहार से वास्तविक समाधान निकालने पर जोर दिया। रैली में वरिष्ठ अधिवक्ता पर्सिवल बिलिमोरिया और आकाश प्रसाद सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने कुत्तों को जबरन हटाने और फीडर्स के खिलाफ हिंसा पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने गायों और बंदरों सहित सभी पशुओं के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और समस्या के समाधान के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक व दीर्घकालिक उपायों को अपनाने का आग्रह किया।
