रमजान में उलमा ने दी जकात और रोजे से जुड़ी अहम जानकारी, जानें Islamic law के नियम
रमजान के पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के सामने आने वाले धार्मिक सवालों के जवाब उलमा की हेल्पलाइन द्वारा दिए जा रहे हैं। कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी की अल-शरिया हेल्पलाइन और ऑल इंडिया गरीब नवाज काउंसिल की हेल्पलाइन ने जकात, फितरा, फिदया और रोजे से संबंधित कई महत्वपूर्ण फतवे जारी किए हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए Islamic law की समझ को गहरा करते हैं।
सोने की जकात: मौजूदा दर पर ही अदा करें
एक अहम सवाल के जवाब में उलमा ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने पिछले सालों में सोने पर अपनी जकात अदा नहीं की है, तो उसे पुरानी दरों के बजाय सोने के मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से जकात निकालनी होगी। यह नियम उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपनी पिछली देनदारियों को पूरा करना चाहते हैं, ताकि वे सही गणना के साथ अपनी धार्मिक जिम्मेदारी निभा सकें।
रोजे की हालत में गोता लगाने और पेट्रोल सूंघने के नियम
रोजे से जुड़े अन्य सवालों पर, उलमा के पैनल ने बताया कि रोजे की हालत में दरिया, नहर या स्वीमिंग पूल में गोता लगाने से रोजा नहीं टूटता, बशर्ते पानी मुंह या नाक के रास्ते हलक से नीचे न उतरे। हालांकि, पेट्रोल या ऐसी किसी नशीली चीज को सूंघने से रोजा टूट जाता है, क्योंकि मौजूदा माहौल में इसे नशे के रूप में देखा जाता है।
आंख में दवा डालने से रोजा नहीं टूटता
एक अन्य स्पष्टीकरण में, हेल्पलाइन ने बताया कि रोजे की हालत में आंख में दवा डालने से रोजा नहीं टूटता है। ये स्पष्टीकरण मुस्लिम समुदाय को रमजान के दौरान अपनी इबादत को सही ढंग से पूरा करने में मदद करते हैं और उन्हें किसी भी भ्रम से बचाते हैं।
