लखनऊ में पुलिस ने एक बड़े GST fraud रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया। इस...
लखनऊ में पुलिस ने एक बड़े GST fraud रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसमें फर्जी फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपये का कारोबार दिखाकर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया गया। इस कार्रवाई से आम जनता के टैक्स से हुई चोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ‘के.एस. इंटरप्राइजेज’ नाम से एक फर्जी फर्म बनाई थी। इस फर्म के जरिए करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये का फर्जी लेन-देन दर्शाया गया और लगभग 37 लाख रुपये की जीएसटी कर चोरी की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान दीपक कुमार, प्रशांत तिवारी और कैलाश मौर्या के रूप में हुई है। इनके पास से चार मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों से संबंधित दस्तावेज और एक पासपोर्ट भी बरामद किया गया है।
फर्जीवाड़े का तरीका
मुख्य आरोपी दीपक कुमार ने अपने नाम और पते पर बैंक खाते खुलवाए और ‘के.एस. इंटरप्राइजेज’ नामक फर्जी फर्म का संचालन किया। इस फर्म के माध्यम से उसने विभिन्न कंपनियों के साथ करोड़ों रुपये का फर्जी लेन-देन दिखाया और प्राप्त धनराशि को अपने साथियों के खातों में स्थानांतरित कर टैक्स चोरी को अंजाम दिया। प्रशांत तिवारी ने दीपक से लगभग 15 लाख रुपये चेक के माध्यम से प्राप्त किए और उनका उपयोग निजी व पारिवारिक कार्यों में किया, साथ ही बैंक खातों के संचालन में भी सहयोग किया। कैलाश मौर्या ने फर्जी तरीके से फर्म की मुहर बनवाई और बैंक खाते खुलवाने के साथ-साथ फर्जी फर्म के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पुलिस के अनुसार, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को 10 से 15 हजार रुपये का लालच देकर उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते और मोबाइल नंबर हासिल करता था। इन दस्तावेजों का उपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाई जाती थीं और उनके नाम पर बैंक खाते खोलकर करोड़ों रुपये का फर्जी लेन-देन किया जाता था। आरोपियों ने फर्जी बिल, ई-वे बिल और इनवॉइस तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का अवैध लाभ उठाया, जिससे सरकार को लगभग 37 लाख रुपये के जीएसटी राजस्व का नुकसान हुआ। फर्म का पंजीकरण भगवती चरण वर्मा मार्ग, महानगर, लखनऊ के एक पते पर कराया गया था, लेकिन वहां कोई कार्यालय संचालित नहीं हो रहा था, जिससे इसकी फर्जी प्रकृति स्पष्ट हो गई। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है।