यूपी में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार, बिल में 10% तक ‘सरचार्ज’
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को इस बार अपने बिजली के बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने हाल ही में विधानसभा में दावा किया था कि पिछले छह सालों से प्रदेश में बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने चुपके से सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं से 10 फीसदी तक अतिरिक्त राशि वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे आम जनता और उद्योगों पर महंगाई के बीच एक और आर्थिक बोझ आ पड़ा है। यह अतिरिक्त वसूली ‘ईंधन एवं बिजली अधिभार’ (Fuel and Power Purchase Adjustment – FPPA) के नाम पर की जा रही है।
इस मुद्दे को आगरा में नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स के उद्यमियों ने प्रमुखता से उठाया। चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि उनकी इकाई का बिजली बिल इस बार 10 हजार रुपये से भी अधिक आया, जबकि खपत में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई थी। बिल की जांच करने पर पता चला कि इसमें 850 रुपये ईंधन एवं बिजली अधिभार के रूप में जोड़े गए हैं। घरेलू उपभोक्ताओं को भी इस अतिरिक्त शुल्क से नहीं बख्शा गया है।
दयालबाग निवासी कारोबारी राजकुमार ने बताया कि उनके 1458 रुपये के बिल में 128 रुपये FPPA चार्ज के रूप में लगे थे। इसी तरह, सुनील कुमार के 462 रुपये के बिल में भी 40.30 रुपये का अतिरिक्त अधिभार शामिल था। यह स्थिति उन परिवारों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो पहले से ही मुश्किल से अपने बिजली बिल का भुगतान कर पाते हैं।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
नेशनल चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल ने इस वसूली को सरासर नाइंसाफी बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें पहले से ही अधिकतम स्तर पर हैं और जिस दर पर बिजली खरीदी जाती है, उससे कई गुना अधिक दाम पर इसे बेचा जा रहा है। ऐसे में यदि थोड़ा बहुत अतिरिक्त खर्च आता है, तो उसे उपभोक्ताओं से वसूलना अनुचित है।
चैंबर उपाध्यक्ष विवेक जैन ने इस बात पर जोर दिया कि अनेक उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके लिए सामान्य बिल जमा कर पाना भी मुश्किल होता है। वे अपने अन्य खर्चों में कटौती करके बिल भरते हैं, और विभाग द्वारा ऐसे उपभोक्ताओं को भी अतिरिक्त सरचार्ज से मुक्त न रखना गलत है। सदस्य सचिन सारस्वत ने बिजली विभाग से अपने सिस्टम में सुधार करने और अन्य राज्यों की तुलना में कम टैरिफ लागू करने की मांग की। उन्होंने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
पूर्व अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा कि जब बिजली विभाग अपने उत्पाद की कीमत कई गुना अधिक वसूल रहा है और पहले से ही भारी मुनाफा कमा रहा है, तो लागत में थोड़ी वृद्धि का भार उपभोक्ताओं पर डालना ठीक नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग पहले से ही इतना मुनाफा कमा रहा है, तो इस अतिरिक्त वृद्धि का भुगतान उपभोक्ता क्यों करें। यह कदम राज्य के लाखों उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाल रहा है।
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