लखनऊ में गूंजा ‘जय शिवाजी’ का उद्घोष, धूमधाम से मनी Shivaji Jayanti
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। कैसरबाग स्थित भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में मराठी समाज उप्र. द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पूरा सभागार ‘जय शिवाजी’ के उद्घोष से गूंज उठा। यह आयोजन छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों और उनके योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था, जिसमें प्रदेश भर से गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।
मुख्य अतिथियों और वक्ताओं का संबोधन
कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को एक बड़ा नाम और युगपुरुष बताते हुए आयोजकों को बधाई दी। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल और बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एमके ठक्कर शामिल थे। महाराष्ट्र से आए मुख्य वक्ता डॉ. संदीप महिंद गुरुजी ने शिवाजी महाराज के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र के बीच उनके विशेष रिश्ते को रेखांकित किया।
शिवाजी महाराज के आदर्शों पर चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज किसी धर्म के विरोधी नहीं थे, बल्कि वे सभी का सम्मान करते थे। उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं और हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। मराठी समाज उप्र. के प्रदेश अध्यक्ष उमेश पाटील ने बताया कि इस कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से 19 फरवरी 2018 को हुई थी, जो अब एक वार्षिक परंपरा बन चुकी है।
विभिन्न क्षेत्रों की विभूतियों का सम्मान
इस अवसर पर ‘छत्रपति शिवाजी महाराज सन्मान स्वराज्य रत्न’ पुरस्कार से सामाजिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महान विभूतियों को सम्मानित किया गया। इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी, केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत और जय नारायण पीजी कॉलेज की प्रो. अनीता बाजपेयी शामिल थीं। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. विश्वनाथ मिश्रा ने किया। इस आयोजन में मराठी समाज उप्र. के संस्थापक अध्यक्ष उमेश पाटील, वरिष्ठ महामंत्री गजानन माने पाटील, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वनाथ देवकर, कोषाध्यक्ष सुरेश मोरे सहित कई अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
