सपा के हंगामे पर CM योगी का पलटवार, बोले- विपक्ष से सदाचार की उम्मीद ‘बेवकूफी’; UP Politics में गरमाहट
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के अभिभाषण के दौरान मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा किए गए हंगामे की कड़ी आलोचना की है। मुख्यमंत्री ने सोमवार को विधानपरिषद में अपने संबोधन में कहा कि इस तरह का आचरण न केवल प्रदेश के संवैधानिक प्रमुख का, बल्कि एक नारी का भी अपमान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष से सदाचार की अपेक्षा करना ‘बेवकूफी’ होगी, क्योंकि यह हंगामा लोकतंत्र को कमजोर करता है और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी हस्तियों की अवमानना के दायरे में आता है।
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि हम सबका दायित्व है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और संवैधानिक प्रमुखों का सम्मान करें, तथा ऐसा कोई आचरण न करें जो भावी पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के इस व्यवहार को उनकी वास्तविक सोच और नकारात्मक दृष्टिकोण का प्रदर्शन बताया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन, कर्फ्यू से कानून के राज, उपद्रव से उत्सव और समस्या से समाधान की यात्रा तय की है। आज देश और दुनिया भी इस बदलाव को स्वीकार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने संकुचित एजेंडे के कारण प्रदेश के भविष्य से खिलवाड़ किया, पहचान का संकट खड़ा किया और प्रदेश को अराजकता, अव्यवस्था तथा अपराध का गढ़ बना दिया था। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता, प्रशासनिक अस्थिरता और विकास विरोधी सोच हावी थी, जहां सत्ता के संरक्षण में गुंडे और माफिया ‘समानांतर सरकार’ चला रहे थे। ‘गुंडा टैक्स’ और अवैध वसूली प्रदेश की नियति बन चुकी थी, और ‘एक जिला, एक माफिया’ उत्तर प्रदेश को झकझोरता था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद ‘डबल इंजन’ की सरकार की स्पष्ट नीति और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता के कारण प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति मिली है और राजस्व घाटे से राजस्व अधिशेष की स्थिति प्राप्त हुई है। उन्होंने दावा किया कि पहले जहां कर्फ्यू और दंगे आम बात थे, पर्व और त्योहार आशंका के केंद्र बन जाते थे, वहीं अब उत्तर प्रदेश ‘फियर जोन से फेथ जोन’ में बदल गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में ‘कर्फ्यू कल्चर’ नहीं बल्कि ‘जीरो टॉलरेंस कल्चर’ है और 2017 के बाद से कोई भी सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है। यह राजनीतिक बयानबाजी प्रदेश की जनता के बीच लोकतंत्र के मूल्यों और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बहस को जन्म देती है।
