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ट्रंप का क़तर प्रेम: इसराइल की नाराज़गी का जोखिम क्यों?

By Oct 6, 2025

डोनाल्ड ट्रंप अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान जिस बात के लिए जाने जाते थे, वह थी उनकी अप्रत्याशित विदेश नीति। मध्य-पूर्व में उनके क़तर के प्रति नरम रुख ने कई विश्लेषकों और क्षेत्रीय सहयोगियों को चौंकाया, खासकर तब जब इसराइल और सऊदी अरब जैसे देशों ने क़तर पर चरमपंथी समूहों को समर्थन देने का आरोप लगाया था। सवाल यह उठता है कि ट्रंप ने इसराइल की नाराज़गी का जोखिम उठाकर भी क़तर के लिए इतनी हद तक जाने का फैसला क्यों किया?

इसकी मुख्य वजहें रणनीतिक और भू-राजनीतिक हितों में निहित हैं। सबसे अहम कारण है क़तर में स्थित अल-उदैद एयरबेस (Al Udeid Air Base)। यह मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, जो अफ़ग़ानिस्तान, इराक और सीरिया में अमेरिकी अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है। ट्रंप प्रशासन के लिए, इस रणनीतिक संपत्ति को बनाए रखना और क़तर के साथ एक स्थिर संबंध स्थापित करना सर्वोपरि था। इस अड्डे से हटने का मतलब था अमेरिकी सैन्य शक्ति और पहुंच में भारी कमी, जिसे ट्रंप कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते थे।

2017 में जब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मिस्र ने क़तर पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए उस पर नाकाबंदी लगा दी थी, तब ट्रंप का रुख शुरुआत में कुछ हद तक सऊदी अरब के पक्ष में दिखा। लेकिन जल्द ही उनके प्रशासन ने क़तर के साथ मध्यस्थता की भूमिका निभाई और यह स्पष्ट कर दिया कि अल-उदैद एयरबेस की वजह से क़तर को पूरी तरह से अलग-थलग नहीं किया जा सकता। तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने भी इस संकट को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इसराइल की चिंताएं अपनी जगह जायज थीं। इसराइल क़तर पर गाजा में हमास जैसे समूहों को वित्तीय सहायता देने का आरोप लगाता रहा है, जिसे क़तर मानवीय सहायता बताता है। इसके अलावा, क़तर के ईरान के साथ संबंध और अल-जज़ीरा चैनल की इजरायल-विरोधी कवरेज भी इसराइल की नाराजगी का कारण थी। हालांकि, ट्रंप ने इन आपत्तियों को दरकिनार करते हुए, अल-उदैद एयरबेस के सामरिक महत्व और क़तर के एक बड़े वैश्विक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यातक होने के आर्थिक पहलू को प्राथमिकता दी।

ट्रंप की विदेश नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आधारित थी, जिसमें तात्कालिक अमेरिकी हितों को सर्वोच्च रखा गया था। उनके लिए, क़तर के साथ संबंध बनाए रखना, चाहे इससे किसी सहयोगी को कितनी भी नाराजगी क्यों न हो, एक व्यावहारिक अनिवार्यता थी। उन्होंने क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की, यह समझते हुए कि खाड़ी में एक सहयोगी को पूरी तरह से अलग-थलग करने से ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है या क्षेत्र में अस्थिरता आ सकती है।

संक्षेप में, ट्रंप का क़तर के प्रति झुकाव किसी व्यक्तिगत पसंद से अधिक एक रणनीतिक गणना का परिणाम था। अल-उदैद एयरबेस की सैन्य अनिवार्यता, क़तर की आर्थिक शक्ति और मध्य-पूर्व की जटिल भू-राजनीतिक वास्तविकताओं ने ट्रंप को इसराइल की नाराज़गी मोल लेने का जोखिम उठाने पर मजबूर किया। यह उनकी ‘सौदेबाजी’ वाली विदेश नीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण था, जहाँ ठोस लाभ अक्सर परंपरागत गठबंधन की अपेक्षाओं से ऊपर रखे गए।

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