मनरेगा घोटाला: अपात्रों को दिखाकर हड़पे 15 लाख, प्रधान-सचिव पर आरोप | UP scam
टप्पल ब्लॉक के ग्राम पंचायत निगुना-सिगुना में मनरेगा योजना के तहत एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें लगभग 15.74 लाख रुपये की सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान कपिल कुमार और पंचायत सचिव ने मिलकर कुछ दबंग जाट परिवारों और अपने सगे-संबंधियों को कागजों पर दलित और अति पिछड़ा वर्ग का दिखाकर इस राशि को हड़प लिया।
शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह उर्फ निरंजन ने जिलाधिकारी को भेजे शिकायती पत्र में बताया है कि प्रधान और सचिव ने मिलकर 57 अपात्र लोगों के फर्जी मनरेगा जॉब कार्ड बनवाए। इन जॉब कार्डों में संपन्न जाट समुदाय के लोग और सरकारी कर्मचारियों की पत्नियां भी शामिल हैं, जो मनरेगा योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सीधे बैंक खातों में 15,74,076 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।
इससे पहले, उपायुक्त श्रम रोजगार (अलीगढ़) की जांच में 186 फर्जी कार्यदिवसों का खुलासा हुआ था और 38,521 रुपये की गबन राशि को पंचायत खाते में वापस जमा कराया गया था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें भेजने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। आरटीआई का जवाब भी अभी तक लंबित है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायत के बाद से आरोपी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, जिसके कारण वे गांव जाने में भी असमर्थ हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच, एफआईआर दर्ज करने, प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज करने और गबन की गई राशि की वसूली की मांग की है। खंड विकास अधिकारी विजय कुमार तिवारी ने कहा है कि यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। इस तरह के घोटालों से सरकारी योजनाओं की मंशा पर सवाल उठता है और जरूरतमंदों तक लाभ नहीं पहुंच पाता।
