उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। एक छात्रा अपनी मां के साथ जिलाधिकारी (DM) विशाख जी के सामने पहुंची और रोते हुए...
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कलेक्ट्रेट में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला। एक छात्रा अपनी मां के साथ जिलाधिकारी (DM) विशाख जी के सामने पहुंची और रोते हुए अपनी समस्या बताई। छात्रा ने कहा कि उसके पिता का पिछले साल निधन हो गया है, जिसके कारण परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है और वह अपनी बोर्ड परीक्षा की फीस जमा नहीं कर पाई है।
छात्रा की यह गुहार सुनकर जिलाधिकारी विशाख जी भावुक हो उठे। उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए न केवल छात्रा को बोर्ड परीक्षा में बैठने का रास्ता साफ किया, बल्कि परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना और पेंशन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया।
पिता की मौत के बाद आई आर्थिक तंगी
शंकरपुरवा (गन्ने का पुरवा) की रहने वाली श्वेता मौर्या अपनी बेटी के साथ DM के पास पहुंची थीं। मां ने बताया कि बिटिया की यूपी बोर्ड परीक्षा सिर पर है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण फीस जमा नहीं हो पाई है। मां की बात पूरी होने से पहले ही छात्रा फफक पड़ी और बोली कि ‘अंकल, पापा की पिछले साल ही डेथ हो गई है, हम किराए के मकान में रहते हैं।’ इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी अधिकारी और फरियादी भावुक हो गए। श्वेता के पति की अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, जिसके बाद तीन बेटियों की जिम्मेदारी श्वेता के कंधों पर आ गई।
DM ने तुरंत दिए निर्देश
मां-बेटी की पीड़ा सुनकर DM विशाख जी ने बाकी फरियादियों को रोक दिया। उन्होंने तुरंत शिक्षा विभाग के अधिकारियों को फोन मिलाया और सख्त निर्देश दिए कि छात्रा को बिना किसी रुकावट के बोर्ड परीक्षा में बैठने दिया जाए। उन्होंने अधिकारियों से छात्रा का प्रवेश पत्र तत्काल उपलब्ध कराने को कहा।
परिवार को मिली सरकारी योजनाओं की सौगात
सुनवाई के दौरान DM को पता चला कि परिवार के पास गांव में जमीन है, लेकिन रहने के लिए घर नहीं है। इस पर DM ने मौके पर ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.5 लाख रुपये भवन निर्माण के लिए जारी करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही श्वेता मौर्य को निराश्रित महिला पेंशन और उनकी दो छोटी बेटियों को बाल सेवा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराई, ताकि उनकी पढ़ाई कभी न रुके। DM के इस संवेदनशील कदम की सभी ने सराहना की।