स्मार्ट सिटी Lucknow news: वृंदावन सेक्टर 7 में 23 साल से सड़क-नाली का इंतजार, नरक जैसा जीवन
लखनऊ को भले ही स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला हो, लेकिन वृंदावन सेक्टर-7 की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। यहां के निवासियों को पिछले दो दशक से अधिक समय से नरक जैसा जीवन जीना पड़ रहा है। कच्ची सड़कें, जलभराव और गंदे पानी की आपूर्ति जैसी समस्याओं ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
यह इलाका पहले आवास विकास के अधीन था, जिसे 2018 में नगर निगम को सौंप दिया गया। इसके बावजूद, 23 साल से यहां सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। 30 फीट की सड़क को मंजूरी मिलने के बावजूद, आवास विकास और नगर निगम के बीच सीमा विवाद के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ है।
गंदे पानी की आपूर्ति से बीमारी का खतरा
चिरैयाबाग में पानी की पाइपलाइन कई महीनों से टूटी हुई है, जिससे तालाब का गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। स्थानीय लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे पेट दर्द और अन्य बीमारियां फैल रही हैं। स्थानीय लोगों ने जलकल विभाग और नगर निगम से शिकायत की है, लेकिन पाइपलाइन की मरम्मत आज तक नहीं हो सकी है।
जलभराव और गंदगी से बुरा हाल
बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है। बगल से गुजरने वाला नाला सेक्टर सात से नहीं जोड़ा गया है, जिससे घुटनों तक पानी भर जाता है। बच्चे और बुजुर्ग घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। कॉलोनी में भैंसों के तबेले होने से रास्ते पर गोबर फैला रहता है, जिससे पैदल चलना मुश्किल हो गया है और नालियां चोक हो गई हैं।
खंडहर बन चुका है पार्क
कॉलोनी में पार्क के नाम पर सिर्फ खंडहर है, जहां सांप-बिच्छू निकलने का खतरा रहता है। स्थानीय निवासी कमलाकांत तिवारी ने बताया कि वे खुद एक बार सांप के डसने से बाल-बाल बचे थे। लोगों ने बताया कि जब वे आवास विकास में शिकायत करते हैं तो नगर निगम जाने को कहा जाता है, और नगर निगम में शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।
