टीबी मुक्त भारत: घर के पास मिलेगी AI आधारित जांच, 74 नई मशीनें खरीद रहा UP
उत्तर प्रदेश में क्षय रोग (टीबी) के मरीजों की खोज और जांच को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। अब मरीजों को जांच के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उनके घर के पास ही अत्याधुनिक मशीनों से जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। इस पहल का उद्देश्य टीबी मुक्त भारत अभियान को जन आंदोलन का रूप देना है, जिसमें सभी की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
नई मशीनों से जांच में तेजी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 74 नई टूनैट (मॉलिक्यूलर) मशीनों और 75 AI सक्षम हैंड हेल्ड एक्सरे मशीनों की खरीद की जा रही है। इन नई मशीनों से एक साथ कई मरीजों के नमूनों की जांच हो सकेगी, जिससे रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। AI आधारित हैंड हेल्ड एक्सरे मशीनों से टीबी मरीजों की पहचान मौके पर ही आसान तरीके से हो सकेगी। वर्तमान में प्रदेश में 87 हैंड हेल्ड एक्सरे मशीनें कार्यरत हैं।
सघन रोगी खोज अभियान और उपलब्धियां
फरवरी से 100 दिन का सघन टीबी रोगी खोज अभियान फिर से शुरू किया जाएगा। राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के एसीएस अमित कुमार घोष ने बताया कि सात दिसंबर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक कुल 3.02 करोड़ जोखिम वाली आबादी की स्क्रीनिंग की गई है। उन्होंने टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश पर ई-न्यूजलेटर का भी विमोचन किया।
टीबी केसेज में कमी और सफलता दर में वृद्धि
एनएचएम एमडी डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि वर्ष 2015 की तुलना में टीबी के नए मरीजों की दर में 17 फीसदी की कमी आई है। नैट मशीनों की संख्या 141 से बढ़कर 930 हो गई है और कल्चर जांच सुविधाएं पांच से बढ़कर 14 तक पहुंच चुकी हैं। टीबी नोटिफिकेशन लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि 76 से बढ़कर 104 फीसदी हुई है। ड्रग सेंसिटिव टीबी मरीजों के इलाज की सफलता दर 85 से बढ़कर 92 फीसदी और ड्रग रेसिस्टेंट टीबी मरीजों के इलाज में बनाए रखने की दर 72 से बढ़कर 87 फीसदी हुई है। नैट जांच की उपलब्धि भी 76 से बढ़कर 91 फीसदी हो गई है।
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