बीमा कंपनी से दिलाया शिक्षिका के इलाज का 1.75 लाख का चेक, लापरवाही का मामला
इलाज में लापरवाही के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित परिवार को 1.75 लाख रुपये का चेक देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने यह फैसला सुनाया। शमसाबाद रोड निवासी बीएन पचौरी ने अपनी पत्नी सुधा पचौरी, जो एक कॉलेज में शिक्षिका थीं, के इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही के लिए बीमा कंपनी के खिलाफ मामला दायर किया था।
शिकायत के अनुसार, सुधा पचौरी को 2012 में पीठ और कमर दर्द की शिकायत के बाद डॉक्टर से परामर्श लिया था। प्रारंभिक उपचार से आराम न मिलने पर जब उन्होंने दोबारा डॉक्टर से संपर्क किया, तो अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पैंक्रियाज में लीजन पाया गया। इसके बावजूद, डॉक्टर ने दवाएं जारी रखीं। बाद में जनवरी 2013 में एक और अल्ट्रासाउंड हुआ, लेकिन तब भी वही दवाएं दी गईं। जब आराम नहीं मिला तो एक अन्य डॉक्टर से संपर्क किया गया, लेकिन पत्नी का सही इलाज नहीं हो सका। इस देरी के कारण स्वास्थ्य बिगड़ता गया और सीटी स्कैन में पैंक्रियाज कैंसर का पता चला। पीड़ित परिवार का मानना है कि यदि समय पर निदान हो जाता तो जान बचाई जा सकती थी। पत्नी की मृत्यु 17 दिसंबर 2014 को हो गई। विपक्षी ने बीमा कंपनी से प्रोफेशनल इंडेमिनिटी पॉलिसी ले रखी थी। इस फैसले से यह सुनिश्चित होता है कि चिकित्सा लापरवाही के मामलों में उपभोक्ताओं को उनके इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति मिल सके।
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