बिजली कंपनियों की स्थिति में सुधार, सरकारी डिस्कॉम्स को सशक्त करने की मांग
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिजली वितरण कंपनियों की 14वीं वार्षिक इंटीग्रेटेड रेटिंग (आईआर) जारी की है, जिसमें देश की 65 बिजली वितरण कंपनियों का मूल्यांकन किया गया। इस रिपोर्ट के अनुसार, पांच में से चार सरकारी बिजली कंपनियों की स्थिति में सुधार हुआ है, जबकि एक कंपनी की स्थिति स्थिर बनी हुई है। यह सुधार मुख्य रूप से लाइन लॉस में कमी और राजस्व वसूली में वृद्धि के कारण संभव हुआ है।
ए प्लस रेटिंग में कुल 15 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें 12 निजी और तीन सरकारी क्षेत्र की हैं। वहीं, ए रेटिंग में 16 कंपनियां हैं, जिनमें 10 निजी और छह सरकारी क्षेत्र की हैं। बी व बी- श्रेणी में 23 कंपनियां और सी व सी- रेटिंग में 11 कंपनियां शामिल हैं। डी श्रेणी में कोई भी कंपनी दर्ज नहीं है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सरकारी क्षेत्र में हुए इस सुधार को देखते हुए निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। उनका तर्क है कि जब सरकारी डिस्कॉम्स का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, तो निजीकरण से जुड़े फैसलों पर रोक लगनी चाहिए, क्योंकि निजीकरण से बिजली महंगी होती है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। उन्होंने सरकार से निजीकरण की बजाय सरकारी डिस्कॉम्स को सशक्त बनाने की नीति अपनाने का आग्रह किया है।
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