मुंबई में बिहार भवन पर मनसे-शिवसेना का विरोध, बिहार सरकार का खुला ऐलान: ‘किसी के बाप में दम नहीं’
मुंबई में बिहार भवन के निर्माण को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ा विरोध जताया है। बिहार सरकार ने इस परियोजना के लिए 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है, जिसके बाद महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मनसे और शिवसेना के विरोध के जवाब में बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि “किसी के बाप में दम नहीं है जो बिहार भवन के निर्माण को रोक सके।” उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि मुंबई किसी की जागीर नहीं है। इस बयानबाजी से राजनीतिक विवाद और गहरा गया है।
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने बिहार भवन को क्षेत्रीय राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि मुंबई की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने मनसे के विरोध को गलत ठहराते हुए कहा कि यह भवन कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक राहत केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
बिहार फाउंडेशन (मुंबई) के अध्यक्ष कैसर खालिद ने बताया कि इस भवन के माध्यम से मुंबई से बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई जाएगी। भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने स्पष्ट किया कि यह 30 मंजिला इमारत पर्यावरण के अनुकूल होगी और इसमें 178 कमरे होंगे।
इस प्रस्तावित बिहार भवन में 240 बेड की क्षमता वाला एक विशेष छात्रावास भी शामिल होगा, जो मुंबई में इलाज कराने आने वाले बिहार के मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक बड़ी सुविधा साबित होगा। यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है जब नवी मुंबई में पहले से ही उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, केरल जैसे कई राज्यों के भवन मौजूद हैं।
