बिहार में FRP नावों का निर्माण शुरू, 30 लोगों की क्षमता वाली नावों की ट्रेनिंग होगी
बिहार में अब पारंपरिक लकड़ी की नावों की जगह फाइबर रिइन्फोर्स प्लास्टिक (FRP) नावों का निर्माण सिखाया जाएगा। राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (निनि) में इस वर्ष के अंत तक इस प्रशिक्षण की शुरुआत होने की उम्मीद है। परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने संस्थान का निरीक्षण कर इस संबंध में जानकारी प्राप्त की।
FRP नावों की खासियतें
निनि में लगभग 10 मीटर लंबी नावों का निर्माण सिखाया जाएगा, जिनमें 25 से 30 लोग एक साथ यात्रा कर सकेंगे। एक नाव को बनाने में लगभग चार महीने का समय लगेगा। इन नावों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये अधिक किफायती हैं और इन्हें करीब 10 साल तक मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ती है। नाव बनाने के लिए आवश्यक सामग्री कोलकाता और मुंबई से मंगाई जा रही है।
जलमार्ग परिवहन को बढ़ावा
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार कोच्चि में इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल (IWDC) की तीसरी बैठक में भाग लेंगे, जहाँ बिहार की जलमार्ग से जुड़ी संभावनाओं और समस्याओं पर चर्चा की जाएगी। मंत्री ने गायघाट से दीघा घाट तक वाटर मेट्रो वेसल में सफर कर जल मार्ग परिवहन और माल ढुलाई की संभावनाओं का जायजा लिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदी परिवहन, रेल और सड़क की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है। इससे बालू, सब्जियां और भारी सामान की ढुलाई आसान होगी, जिससे सड़क जाम और दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
बुनियादी ढांचे का विकास
वर्तमान में बिहार में दो रोपेक्स वेसल संचालित हैं और 21 सामुदायिक जेटियां हैं। 17 अतिरिक्त स्थानों पर नई सामुदायिक जेटियां विकसित की जाएंगी, जहाँ हाट भी लगाए जा सकेंगे। जलमार्ग से माल ढुलाई के लिए नए अंतर्राज्यीय टर्मिनल बनाए जाएंगे, जिससे भागलपुर-विराटनगर के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। नेपाल के साथ भी जलमार्ग के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। प्रदेश में 1550 घाट और 6600 से अधिक पंजीकृत नावें हैं। जलवाहक योजना के तहत राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के लिए दूरी 300 किमी से घटाकर 100 किमी करने का प्रस्ताव है, जिससे बक्सर, पटना, मोकामा, भागलपुर जैसे शहरों के बीच जल परिवहन को और बढ़ावा मिलेगा।
