विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ पर सेंसर बोर्ड का रुख: 14 कट अंतिम नहीं, मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई
अभिनेता विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ इन दिनों विवादों में घिरी हुई है। मद्रास हाई कोर्ट ने मंगलवार को इस फिल्म के प्रमाणन पर रोक लगा दी है। फिल्म के निर्माताओं, केवीएन प्रोडक्शंस, ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के खिलाफ यह याचिका दायर की है।
सुनवाई के दौरान, CBFC ने अदालत को सूचित किया कि फिल्म पर अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, फिल्म में सुझाए गए 14 कट अंतिम नहीं हैं, बल्कि यह प्रक्रिया का एक मध्यवर्ती चरण है। इस संबंध में बोर्ड द्वारा अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। यह मामला फिल्म के प्रमाणन को लेकर चल रही प्रक्रिया की जटिलताओं को उजागर करता है, जिसका सीधा असर दर्शकों तक फिल्म की पहुंच पर पड़ सकता है।
‘जना नायकन’ को विजय की आखिरी फिल्म के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। विजय आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने की तैयारी कर रहे हैं और सक्रिय राजनीति में कदम रखने की संभावना है। एच विनोद द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक बड़े बजट की बताई जा रही है, जिसके निर्माण में लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सुनवाई के दौरान, CBFC की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन ने अदालत को बताया कि ‘सिनेमैटोग्राफ अधिनियम’ के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 6 जनवरी को निर्माताओं को सूचित किया गया था कि फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेजा गया है। पहले यह खबर थी कि बोर्ड ने एक निर्णय ले लिया है, लेकिन बाद में, प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, फिल्म को आगे की समीक्षा के लिए भेजा गया।
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी सवाल किया कि क्या फिल्म को पुनरीक्षण समिति के पास भेजने की सूचना चेन्नई के क्षेत्रीय कार्यालय से आई थी या मुंबई के मुख्य बोर्ड से। CBFC के अनुसार, यह जानकारी मुंबई से भेजी गई थी। एआरएल सुंदरेशन ने यह भी कहा कि जांच समिति द्वारा सुझाए गए 14 कट केवल एक अस्थायी उपाय हैं और इन्हें अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड की अध्यक्ष ने अभी तक फिल्म के संबंध में कोई अंतिम आदेश नहीं दिया है।
CBFC ने निर्माताओं के 500 करोड़ रुपये के निवेश के दावे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब फिल्म को अभी तक प्रमाण पत्र नहीं मिला है, तो पहले से रिलीज की तारीख तय करना समझ से परे है। CBFC ने यह भी तर्क दिया कि बोर्ड को पहली हाई कोर्ट सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला, और 6 जनवरी को भेजे गए नोटिस को अदालत में चुनौती भी नहीं दी गई थी। अदालत अब दोपहर के भोजन के बाद केवीएन प्रोडक्शंस की दलीलें सुनेगी, जिसके बाद आगे की सुनवाई होगी।
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