बिहार विश्वविद्यालय: परीक्षा शुरू होने से 2 दिन पहले तक भरे जा रहे फॉर्म, परीक्षा बोर्ड के निर्णय की अवहेलना
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर में परीक्षा शुरू होने से महज़ दो दिन पहले तक परीक्षा फॉर्म भरे जा रहे हैं। यह परीक्षा बोर्ड के उस निर्णय का खुला उल्लंघन है जिसमें परीक्षा शुरू होने के 10 दिन पहले फॉर्म भरने की प्रक्रिया बंद करने का आदेश था। इस अव्यवस्था के कारण रिजल्ट और एडमिट कार्ड में त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है।
विश्वविद्यालय की ओर से तय की गई समय-सीमा पर कॉलेज अक्सर छात्रों के परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाते हैं। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी, कई कॉलेज छात्र हित का हवाला देते हुए पोर्टल खोलने का अनुरोध करते हैं, जिस पर विश्वविद्यालय विचार कर लेता है। स्नातक प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए भी मंगलवार को दोपहर तीन बजे तक पोर्टल खोला गया था। इसी तरह की स्थिति पीजी और स्नातक की अन्य परीक्षाओं में भी देखी जा रही है, जहाँ अंतिम समय तक फॉर्म भरने की आपाधापी मची रहती है।
अंतिम समय तक फॉर्म भरने से परिणामों में गड़बड़ी और एडमिट कार्ड में त्रुटियों की आशंका बढ़ जाती है। कई बार विश्वविद्यालय को छात्रों की वास्तविक संख्या का भी सही अनुमान नहीं लग पाता है। इसके अतिरिक्त, कॉलेज फॉर्म भरने के बाद भी शुल्क का विवरण समय पर उपलब्ध नहीं कराते हैं। बार-बार अंतिम तिथि बढ़ाने से इस प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले वोकेशनल कोर्स के दौरान भी नामांकन के लिए पोर्टल खोला गया था, जिसे विश्वविद्यालय ने सीट भरने का कारण बताया था।
परीक्षा बोर्ड ने पिछले दिनों यह निर्णय लिया था कि परीक्षा शुरू होने से 10 दिन पहले फॉर्म भरने की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी और ऐसे कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद, परीक्षा विभाग इस निर्णय का पालन नहीं कर रहा है। माना जा रहा है कि निजी कॉलेज अंतिम समय तक छात्रों का नामांकन और फॉर्म भरवाते हैं। पिछले साल भी परीक्षा शुरू होने से एक दिन पहले तक फॉर्म भरे गए थे, जिससे छात्रों की संख्या का आकलन नहीं हो पाया और कई केंद्रों पर प्रश्न पत्र भी कम पड़ गए थे। परीक्षा नियंत्रक डॉ. राम कुमार ने कॉलेजों को निर्देश जारी करने की बात कही है कि वे निर्धारित अवधि में ही फॉर्म भरकर विवरण उपलब्ध कराएं।
