शोध केवल डिग्री तक सीमित न रहे, समाधान-उन्मुख हो: प्रो. त्रिपाठी
कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ ने ‘भारत बोध: राष्ट्र पुनर्निर्माण हेतु शोध’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के डीन प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी शामिल हुए।
प्रो. त्रिपाठी ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक डिग्री प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। बल्कि, यह समस्या-समाधान पर केंद्रित, समाज के प्रति जवाबदेह और सरकारी नीतियों के लिए प्रासंगिक होना चाहिए। उन्होंने शोधकर्ताओं को अपने काम में मौलिकता, नैतिक सिद्धांतों का पालन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही, उन्होंने भारतीय समाज की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी दृष्टिकोण विकसित करने के महत्व को भी रेखांकित किया।
विश्वविद्यालय की डीन अनुसंधान एवं विकास, डॉ. नमिता तिवारी ने बताया कि विश्वविद्यालय एक मजबूत और सक्रिय शोध वातावरण बनाने के लिए पूरी तरह से समर्पित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवोदित शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य करने और जिम्मेदार प्रकाशनों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहायता प्रदान की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य शोधकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण कार्य के प्रति संवेदनशील बनाना है।
