संभल मस्जिद सर्वे हिंसा: SP ने कोर्ट में सुनाई खौफनाक दिन की कहानी, 100+ सवाल पूछे गए
संभल में जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में हुई हिंसा के मामले में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के बयान एडीजे कोर्ट में दर्ज किए गए। उन्होंने छह घंटे तक चली सुनवाई में 100 से अधिक सवालों के जवाब दिए, जिसमें हिंसा की वजह, नियंत्रण और पुलिस पर हुए हमले का विवरण शामिल था। यह घटना 24 नवंबर 2024 को हुई थी, जब मस्जिद के सर्वे के दौरान उपद्रवियों ने हमला किया था।
कोर्ट में SP के बयान
संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के विरोध में हुई हिंसा प्रकरण में सोमवार को पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने जिला न्यायालय परिसर में एडीजे पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश अवधेश कुमार सिंह की अदालत में अपने बयान दर्ज कराए। आरोपित पक्षों के पांच अधिवक्ताओं ने अलग-अलग बयान दर्ज करते हुए हिंसा से जुड़े 100 से अधिक सवाल पूछे, जिनका पुलिस अधीक्षक ने विस्तार से जवाब दिया।
सर्वे और हिंसा की पृष्ठभूमि
मामला 19 नवंबर 2024 को शुरू हुआ जब संभल की शाही जामा मस्जिद के हरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ। दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को निर्धारित था, लेकिन इसी दिन सर्वे के विरोध में हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने इस दौरान चार लोगों की हत्या कर दी थी।
पुलिस पर हमले का विवरण
सोमवार को दर्ज हुए बयानों के अनुसार, 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के संबंध में थाना नखासा में मुकदमा अपराध संख्या 304/2024 दर्ज किया गया था। इस मामले में एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने गवाही दी। जिला शासकीय अधिवक्ता आदित्य कुमार सिंह ने एसपी के बयान दर्ज कराए। अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता जकी अनवर, आफताब हुसैन, कमर हुसैन, जमाल पाशा और मसूद अली फारुखी ने एसपी से सवाल पूछे। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, एसपी और उनके पीआरओ सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की गई थी, जिसमें एसपी के पैर में छर्रे लगे थे।
घटना का विस्तृत विवरण
पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने दोपहर 12 बजे से शाम छह बजे तक चले अपने बयान में बताया कि उनसे पूछा गया कि उन्हें गोली कहां लगी, उस समय वे कहां थे, हिंसा कैसे हुई और उस पर कैसे नियंत्रण पाया गया। इस दौरान कई क्रॉस-क्वेश्चन भी किए गए, जिनका एसपी ने पूरी घटना का विवरण बताते हुए जवाब दिया।
दर्ज FIR और जांच
24 नवंबर 2024 को एसपी के पीआरओ संजीव कुमार की तहरीर पर थाना नखासा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1932 की धारा 7 के तहत 100-150 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इस मामले में विशेष जांच दल (एसआइटी) ने 40 से अधिक अभियुक्तों को नामजद किया है, जिनमें से 25 से अधिक को जेल भेजा जा चुका है। हालांकि, इनमें से कुछ अभियुक्तों को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
