चंबल सैंक्चुअरी में इंडियन स्कीमर के अंडे: विलुप्तप्राय पक्षी संरक्षण की उम्मीद जगी, Indian Skimmer breeding
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य में विलुप्त हो रहे इंडियन स्कीमर पक्षी के दो दर्जन अंडे मिलने से खुशी का माहौल है। यह घटना बरचौली गांव के पास हुई है, जो इस प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। लगभग चार साल के अंतराल के बाद इन अंडों का मिलना पक्षी प्रेमियों के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से इनकी संख्या में कमी देखी जा रही थी और प्रजनन लगभग न के बराबर था।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समय मौसम अनुकूल होने के कारण लगभग 350 इंडियन स्कीमर चंबल नदी में प्रवास कर रहे हैं। विभाग ने इन पक्षियों के घोंसलों को सुरक्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए हैं, जिससे इस सर्दी में इनका प्रवास बढ़ा है। यह उत्साहजनक खबर है कि चंबल सैंक्चुअरी में इन पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण बन रहा है।
इंडियन स्कीमर अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट के लिए जाने जाते हैं, जिसमें ऊपरी चोंच छोटी और निचली चोंच लंबी होती है, जिसका उपयोग वे शिकार के लिए करते हैं। ये पक्षी मुख्य रूप से नदियों और उनके मुहानों पर पाए जाते हैं। इनके काले, सफेद और नारंगी रंग के चमकीले धब्बे इन्हें और भी आकर्षक बनाते हैं। राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैला है, मुख्य रूप से घड़ियालों, कछुओं और विभिन्न पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
इस वर्ष मौसम की अनुकूलता के कारण, भारेश्वर संगम और महुआसूंडा जैसे क्षेत्रों में लगभग 100 जोड़े इंडियन स्कीमर देखे जा रहे हैं, जिससे चंबल नदी के इन पक्षियों से गुलजार होने की उम्मीद जगी है। बरचौली, भरेह संगम, पिपरौली गढ़िया, महुआ सुंडा और सहसों जैसे क्षेत्र इनके पसंदीदा टापुओं वाले इलाके हैं। चंबल सैंक्चुअरी में मिले अच्छे संरक्षण के कारण इनकी संख्या में प्रतिवर्ष वृद्धि देखी जा रही है।
यह खूबसूरत पक्षी लगभग नौ महीने तक चंबल नदी के रेतीले टापुओं पर रहता है और बाढ़ आने से पहले दूसरे स्थानों के लिए उड़ान भर देता है। नवंबर में इनकी वापसी शुरू हो जाती है। जुलाई-अगस्त में ये गुजरात के जामनगर, आंध्र प्रदेश के काकीनाडा और बांग्लादेश के निझुम द्वीप तक प्रवास करते हैं और फिर वापस चंबल लौट आते हैं। इनके बच्चे जन्म के समय भूरे रंग के होते हैं, जबकि वयस्क होने पर इनकी लंबी गुलाबी चोंच, सफेद गर्दन, गुलाबी पंख और काला धड़ होता है।
स्वच्छ जल वाली चंबल नदी, घड़ियालों की तरह ही इंडियन स्कीमर के लिए भी जीवनदायिनी साबित हो रही है। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य के रिकॉर्ड के अनुसार, 2011 में जहां इनकी संख्या 224 थी, वहीं 2022 में यह बढ़कर 512 हो गई। यह पक्षी साफ पानी के किनारे नम रेत वाले टापुओं पर प्रजनन करता है और उड़ते हुए पानी में तैरती मछलियों का शिकार करता है। पानी को चीरकर शिकार करने की इनकी अनूठी कला के कारण इन्हें ‘पनचीरा’ के नाम से भी जाना जाता है। 2000 के दशक में इनकी संख्या में गिरावट आई थी, लेकिन 2008 के बाद वन विभाग के संरक्षण प्रयासों से इनकी संख्या में वृद्धि हुई है।
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