K.J. Yesudas: लता मंगेशकर को टक्कर देने वाले ‘दिव्य गायक’ जिन्होंने 60 साल में गाए 50 हजार गाने, जानिए क्यों ठुकराए अवॉर्ड्स
संगीत की दुनिया के एक ऐसे सदाबहार गायक जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज से दशकों तक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। ‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा’, ‘चांद अकेला जाए सखी रे’ जैसे अनगिनत हिट गाने देने वाले के.जे. येसुदास को ‘गणगंधर्वन’ यानी ‘दिव्य गायक’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने न केवल हिंदी बल्कि मलयालम, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, बंगाली, मराठी जैसी कई भाषाओं में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है।
के.जे. येसुदास ने अपने 60 साल के लंबे संगीत सफर में कथित तौर पर 50 हजार से अधिक गाने गाए हैं, जो लता मंगेशकर के गाए गानों की संख्या के बराबर माने जाते हैं। उन्हें अपने गायन के लिए अनगिनत पुरस्कारों से नवाजा गया है, जिनमें 8 राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं। पुरस्कारों की इस झड़ी से एक बार तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि अब उन्हें और अवॉर्ड्स न दिए जाएं, क्योंकि उनके पास पहले से ही बहुत सारे अवॉर्ड्स हैं।
केरल में जन्मे येसुदास ने सिर्फ 7 साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू कर दिया था। उनके पिता ऑगस्टाइन जोसेफ खुद एक संगीतकार थे, जिन्होंने उन्हें प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया। बाद में उन्होंने चेम्बई वैद्यनाथ भगवतर जैसे महान गुरुओं से शास्त्रीय गायन की शिक्षा ली। 1960 के दशक में अपने करियर की शुरुआत करने वाले येसुदास ने ‘कालपादुकल’ से बतौर प्लेबैक सिंगर डेब्यू किया और ‘जय जवान जय किसान’, ‘छोटी सी बात’, ‘चितचोर’ जैसी फिल्मों में यादगार गाने गाकर अपनी एक अलग पहचान बनाई।
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