बंगाल का बदलता राजनीतिक माहौल: भाजपा को मिल रही कड़ी टक्कर, Mamata Banerjee सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
पश्चिम बंगाल का राजनीतिक माहौल इस समय चरम पर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के छापों को मुद्दा बनाकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, जबकि गृहमंत्री अमित शाह ने हालिया बंगाल दौरे से भाजपा की चुनावी रणनीति को धार दी है। शाह ने कोलकाता में एक प्रेस वार्ता के माध्यम से पार्टी के मुद्दों को स्पष्ट किया और कार्यकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने बंगाल में भय, भ्रष्टाचार और घुसपैठ की राजनीति के स्थान पर विकास, विरासत और गरीब कल्याण की सरकार बनाने का संकल्प दोहराया।
भाजपा की बढ़ती पैठ राज्य में स्पष्ट दिख रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में भले ही तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की हो, लेकिन भाजपा मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें भले ही कम हुईं हों, लेकिन 39% मत और 12 सीटें यह दर्शाती हैं कि तृणमूल कांग्रेस के समानांतर उसका एक ठोस जनाधार विकसित हो चुका है। ऐसे में, भाजपा द्वारा सरकार बनाने का दावा अतिशयोक्ति नहीं माना जा सकता।
बंगाल में 2021 के मुकाबले राजनीतिक परिदृश्य काफी बदल चुका है। पड़ोसी देश बांग्लादेश की घटनाओं का प्रभाव राज्य पर अधिक है। राज्य में लगभग 30% मुस्लिम मतदाता और वामपंथी सोच वाले मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग तृणमूल कांग्रेस का पारंपरिक समर्थक रहा है। हालांकि, बांग्लादेश में हिंदुओं के विरुद्ध हुई हिंसा और बढ़ते कट्टरवाद ने हिंदू मतदाताओं को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है। इसके अलावा, सीमा पार से घुसपैठ और तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी मतदाताओं के रुख को प्रभावित किया है।
ममता बनर्जी सरकार पर सत्तापोषित भ्रष्टाचार, विरोधियों के दमन, महिलाओं के शोषण, बेरोजगारी और पलायन जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं। इन मुद्दों के कारण तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जनमत बनता दिख रहा है। ममता बनर्जी द्वारा मुस्लिम मतों को एकजुट रखने के प्रयास और बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों के विरुद्ध हिंसा पर उनकी प्रतिक्रिया ने हिंदू मतदाताओं में पुनर्विचार की भावना को जन्म दिया है। इसी पृष्ठभूमि में, भाजपा इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने का दावा कर रही है, जिसे राज्य के बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है।
