साइबर अपराध जांच: बैंक खाते फ्रीज/डी-फ्रीज पर SC में सुनवाई, बनेगी SOP
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज और डी-फ्रीज करने के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने के निर्देश देने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नागरिकों के वित्तीय अधिकारों और जांच एजेंसियों की शक्तियों के बीच संतुलन स्थापित करेगा।
न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने केंद्र सरकार को याचिका की प्रति सौंपने का आदेश दिया है और मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि देश भर की सभी जांच एजेंसियों को ऐसे दिशानिर्देश जारी किए जाएं कि किसी भी बैंक खाते को बिना लिखित, तर्कसंगत आदेश और खाताधारक को सूचना दिए 24 घंटे के भीतर फ्रीज न किया जाए।
याचिकाकर्ता विवेक वाष्र्णेय ने तमिलनाडु पुलिस के साइबर सेल द्वारा बिना पूर्व सूचना, संचार या न्यायिक अनुमोदन के उनके बैंक खाते को मनमाने ढंग से फ्रीज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) और 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
याचिका में कहा गया है कि एक समान एसओपी तैयार करने से मनमानी कार्रवाई रुकेगी और देश भर में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। याचिकाकर्ता का दावा है कि खाते को फ्रीज करने के आदेश से वह पूरी तरह वित्तीय रूप से पंगु हो गए हैं और अपने पेशेवर व व्यक्तिगत दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हैं।
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