लखनऊ में RSS के Hindu conference में समाज की कुरीतियों पर चिंता, एकता का आह्वान
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में लखनऊ में भव्य हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए। इन सम्मेलनों का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना, परिवार प्रबोधन करना और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करना था। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो समाज में एकता और जागरूकता की आवश्यकता को दर्शाता है।
समाज में एकता और कुरीतियों पर चिंता
सम्मेलनों में वक्ताओं ने हिन्दू समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने और एकजुट होकर रहने का आह्वान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वान्त रंजन ने जोर दिया कि हमें पूरे हिन्दू समाज को जोड़कर चलना है और परस्पर आत्मीयता व समरसतापूर्ण व्यवहार बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि समाज को तोड़ने के प्रयासों के बीच, हिन्दू समाज की कुरीतियों को मिलकर दूर करने के लिए प्रयत्न करना होगा।
राजनेताओं पर समाज को बांटने का आरोप
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने कथित राजनेताओं पर हिन्दू समाज को टुकड़ों में तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन राजनेताओं ने देवी-देवताओं और महापुरुषों को भी जातियों में बांट दिया है, जिससे समाज में विभाजन पैदा हुआ है। अनिल ने बाबा साहब डॉ. आम्बेडकर के ‘शिक्षित बनो, संगठित बनो’ के संदेश को भी एक जाति विशेष तक सीमित करने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की।
संघ का एकता और अखंडता पर जोर
अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री संजय श्रीहर्ष ने बताया कि संघ अपनी स्थापना के समय से ही हिन्दू समाज की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के सिद्धांत का पालन करने पर जोर दिया। सामाजिक समरसता गतिविधि के प्रान्त प्रमुख राजकिशोर ने मंदिरों को जन जागृति का केंद्र बनाने और हिन्दू समाज से विषमता दूर करने की बात कही। इन सम्मेलनों का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ और यह 31 जनवरी तक लखनऊ की सभी बस्तियों में आयोजित किए जाएंगे।
