एआई अप्रासंगिक कौशल खत्म करेगा, युवाओं को नए हुनर सीखने की जरूरत: डॉ. राजेश्वर सिंह
सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में युवाओं की भूमिका, जिम्मेदारी और तैयारी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि एआई अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की निर्णायक शक्ति बन चुका है। वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2030 तक 86 प्रतिशत नियोक्ता अपने व्यवसाय मॉडल में एआई आधारित बदलाव की अपेक्षा कर रहे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर 4.8 ट्रिलियन डॉलर का प्रभाव पड़ने का अनुमान है।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि एआई मानवता को समाप्त नहीं करेगा और न ही सभी नौकरियां खत्म करेगा। इसके बजाय, यह पुराने, अप्रासंगिक कौशलों को समाप्त करेगा और कुशल व नैतिक सोच रखने वाले युवाओं को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, कानून, इंजीनियरिंग, शिक्षण, शासन, रक्षा और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में एआई साक्षरता को अनिवार्य बताया है।
युवाओं से आग्रह है कि वे आलोचनात्मक सोच, प्रभावी संवाद, नैतिक जिम्मेदारी, नेतृत्व और टीमवर्क के साथ-साथ एआई कौशल विकसित करें। यह समझना महत्वपूर्ण है कि एआई कैसे काम करता है, इसके टूल्स का उत्पादक उपयोग कैसे करें, एआई आउटपुट की सत्यता की जांच कैसे करें, और एआई से जुड़े जोखिमों व पूर्वाग्रहों को कैसे समझें। ये सभी आने वाले समय की मूलभूत आवश्यकताएं हैं।
उन्होंने युवाओं को चेताया कि केवल डिग्री के पीछे भागना, रटंत विद्या, तकनीक की अनदेखी और समय को विभाजनकारी सोच में बर्बाद करना भविष्य के लिए घातक सिद्ध होगा। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि यदि युवाओं का कौशल बढ़ेगा तो भारत विश्व में नेतृत्व करेगा, अन्यथा अवसर हाथ से निकल जाएगा।
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