जयशंकर ने पाकिस्तानी स्पीकर से मिलाया हाथ, पाकिस्तान ने इसे ‘जीत’ बताया; भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या असर?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में बांग्लादेश के ढाका में आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से शिष्टाचार के तहत हाथ मिलाया। इस घटना को पाकिस्तान ने अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस सामान्य शिष्टाचार भेंट को भारत-पाकिस्तान संबंधों (India Pakistan relations) में बदलाव के संकेत के तौर पर पेश किया जा रहा है, जबकि भारत ने इस पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं की है।
भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच संबंध बेहद तनावपूर्ण हैं। विशेष रूप से, पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति को और सख्त कर दिया था। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक द्विपक्षीय बातचीत संभव नहीं है।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इनमें सिंधु जल संधि (IWT) से संबंधित बैठकों में भागीदारी को निलंबित करना भी शामिल था। यह कदम भारत की ओर से पाकिस्तान को एक स्पष्ट संदेश था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, भारत ने सीमा पार आतंकी ठिकानों पर लक्षित हमले भी किए थे, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के कैंपों को निशाना बनाया गया था।
पाकिस्तान द्वारा इस शिष्टाचार भेंट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश उसकी हताशा को दर्शाती है। भारत ने अपने राजनयिक और रणनीतिक कदमों से यह स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन यह आतंकवाद को बढ़ावा देने की कीमत पर नहीं होगा।
