इंदौर में दूषित पानी से 9 मौतें, ‘Indore water crisis’ पर गरमाई सियासत
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले संक्रमण के कारण अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरने वालों में 5 माह का एक मासूम बच्चा भी शामिल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन मौतों की सही संख्या छिपा रहा है।
मौतों की संख्या पर विरोधाभास
इस मामले में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभास है। कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, 4 लोगों की मौत हुई है और 149 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की पुष्टि की है और 116 लोगों के बीमार होने की जानकारी दी है। इससे पहले, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तीन लोगों की मौत की पुष्टि की थी। इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
प्रशासन ने शुरू किया मुफ्त इलाज
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं तेज कर दी हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और कलेक्टर शिवम वर्मा लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र के सभी अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों का इलाज मुफ्त किया जाए और इसका पूरा खर्च शासन वहन करेगा।
जांच समिति गठित, अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता आईएएस नवजीवन पंवार कर रहे हैं। इस समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय शामिल हैं। प्रशासन ने कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी की है।
विपक्ष का हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की विफलता बताया है। उन्होंने कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने नए वर्ष की उमंग को शोक और मातम में बदल दिया है।
