भारत में 39.5 लाख पहुंचा शादी का औसत खर्च, बढ़ते जोखिमों के बीच Wedding Insurance कितना जरूरी?
भारत में शादियों का स्वरूप बदल चुका है। अब ये सिर्फ पारिवारिक समारोह नहीं, बल्कि बड़े इवेंट बन गए हैं। लग्जरी वेन्यू, डेस्टिनेशन वेडिंग और भव्य सजावट के कारण शादी का औसत खर्च तेजी से बढ़ा है। वेडमीगुड की 5वीं एनुअल वेडिंग रिपोर्ट 2025 के अनुसार, भारत में एक शादी का औसत खर्च अब 39.5 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इस बढ़ते खर्च के साथ ही वित्तीय जोखिम भी बढ़ गए हैं, जिसके कारण वेडिंग इंश्योरेंस जैसे विकल्पों की मांग बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेस्टिनेशन वेडिंग का खर्च और भी ज्यादा है, जो औसतन 58 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। शहरों के हिसाब से देखें तो जयपुर में शादी का औसत बजट 73 लाख रुपये है, जबकि दिल्ली में यह 38 लाख रुपये है। शादी के खर्च का दबाव इतना है कि करीब 15.2 फीसदी परिवार शादी के लिए लोन ले रहे हैं, जिसकी औसत रकम 15.5 लाख रुपये है।
लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद, अधिकतर शादियां बिना किसी वित्तीय सुरक्षा के प्लान की जाती हैं। अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी, खराब मौसम, वेन्यू से जुड़ी समस्या या किसी वेंडर का आखिरी समय पर मना कर देना, महीनों की तैयारी और लाखों रुपये के निवेश को बर्बाद कर सकता है।
वेडिंग इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर शादी के रद्द होने या टलने, संपत्ति को नुकसान, पर्सनल एक्सीडेंट और थर्ड पार्टी लाइबिलिटी जैसे जोखिमों को कवर करती है। कुछ प्लान शादी के कपड़े, ज्वेलरी और गिफ्ट जैसे कीमती सामान की सुरक्षा भी देते हैं।
हालांकि, वेडिंग इंश्योरेंस में कई शर्तें होती हैं। टैक्स एडवाइजरी प्लेटफॉर्म Taxology India ने चेतावनी दी है कि पॉलिसी लेने से पहले उसके नियम और कवरेज को अच्छी तरह समझना जरूरी है। पॉलिसी में लापरवाही से हुई क्षति, स्वेच्छा से शादी रद्द करना या बीमित वेन्यू से बाहर हुई घटनाएं आमतौर पर कवर नहीं होतीं।
