5 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या: Haryana High Court ने दोषी की मौत की सजा 30 साल की उम्रकैद में बदली
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के पलवल जिले में 5 साल की बच्ची के दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपित की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषी को बिना किसी रिहाई या माफी के 30 साल तक जेल में रहना होगा। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला समाज की अन्य बच्चियों को आरोपित की विकृत मानसिकता से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है।
कोर्ट ने पीड़ित परिवार को राहत देते हुए जुर्माने की राशि बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राशि पीड़ित बच्ची के माता-पिता और भाई-बहनों को समान रूप से मुआवजे के तौर पर दी जाए। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार को यथासंभव न्यायसंगत राहत प्रदान करना भी है।
यह फैसला जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सुखविंदर कौर की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा भेजे गए डेथ रेफरेंस (मौत की सजा की पुष्टि) और अभियुक्त की अपीलों पर विस्तृत सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी, बल्कि दुष्कर्म के सबूत मिटाने की घबराहट में की गई।
घटना 31 मई 2018 की है, जब आरोपित, जो बच्ची के पिता के यहां काम करता था, बच्ची को अपने साथ घर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर रसोई के चाकू से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को आटे के ड्रम में छिपा दिया गया।
अदालत ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह साबित होती है। ग्रामीणों ने आरोपित को बच्ची का हाथ पकड़कर अपने घर की ओर जाते देखा था। बाद में बच्ची का शव आरोपित के घर के परिसर में रखे ड्रम से बरामद हुआ। ड्रम और पास पड़े पत्थर पर मिले खून के धब्बे बच्ची के डीएनए से मेल खाते थे।
हाई कोर्ट ने आरोपित की मां को बरी कर दिया, जिसे ट्रायल कोर्ट ने सात साल की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा कि वह केवल अपने “राजा बेटे” को बचाने की कोशिश कर रही थी और इस आधार पर उसे भारतीय दंड संहिता के तहत दंडित नहीं किया जा सकता। पीठ ने टिप्पणी की कि इस क्षेत्र में अक्सर माताएं अपने बेटों के प्रति अंधा प्रेम रखती हैं।
