यमुनानगर में 2025 में बिगड़े हालात, 214 दिन खराब रही हवा; जल संकट ने बढ़ाई चिंता (Yamunanagar news)
यमुनानगर के लिए वर्ष 2025 हवा और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के मामले में चुनौतीपूर्ण रहा। सालभर में ज्यादातर दिन शहर वायु प्रदूषण की चपेट में रहा, जिससे आमजन को सांस व स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। औद्योगिक गतिविधियां, बढ़ते ट्रैफिक और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियों ने प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ाया।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में यमुनानगर में 214 दिनों तक प्रदूषण की स्थिति खराब बनी रही, जबकि 29 दिन हालात बेहद खराब श्रेणी में पहुंचे। जुलाई, अगस्त और सितंबर में अत्यधिक बारिश के कारण 122 दिनों तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) संतोषजनक दर्ज किया गया। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने स्थिति सुधारने के दावे किए, लेकिन धरातल पर खास बदलाव नजर नहीं आया।
दूषित पानी की सप्लाई को लेकर भी लोगों में असंतोष दिखा। जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं की विभाग के पास 28 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। विभाग द्वारा जांचे गए 7,474 नमूनों में से करीब पांच प्रतिशत यानी 358 सैंपल फेल पाए गए। स्वास्थ्य विभाग की जांच में भी 16,815 सैंपलों में से 438 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह स्पष्ट करता है कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
भूजल स्तर के मामले में भी हालात गंभीर रहे। यमुनानगर जिले के व्यासपुर खंड में भूजल का दोहन वाटर रिचार्ज की तुलना में कहीं अधिक हो रहा है। अगर समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में व्यासपुर खंड के रेड जोन में शामिल होने की पूरी आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, अनियंत्रित नलकूपों, अधिक सिंचाई और वर्षा जल संचयन की कमी के कारण हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। जिले में हर साल औसतन एक से डेढ़ फीट तक भूजल स्तर नीचे खिसक रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अटल भूजल योजना के तहत जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के प्रयासों की बात कही है।
