लखनऊ में शुरू हुई आवारा कुत्तों की गणना, मेरठ टेंडर में अटका
लखनऊ नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आवारा कुत्तों की गणना का कार्य पूरा कर लिया है। वहीं, गोरखपुर में यह गणना जल्द शुरू होने वाली है, जबकि बरेली और कानपुर में भी यह प्रक्रिया प्रगति पर है। इसके विपरीत, मेरठ नगर निगम आवारा कुत्तों की गणना के लिए टेंडर प्रक्रिया में ही अटका हुआ है। निविदाओं में रुचि न आने के कारण चार बार टेंडर निरस्त होने के बाद अब पांचवीं बार प्रक्रिया चल रही है।
टेंडर प्रक्रिया में देरी का कारण
नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि फर्म चयन का कार्य 31 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद चयनित फर्म आवारा कुत्तों की गणना का काम शुरू करेगी। कमेला रोड पर नए एनिमल कंट्रोल बर्थ सेंटर व शेल्टर होम के संचालन के लिए फर्म चयन की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी तकनीकी बिड खुल चुकी है। तीन फर्मों ने निविदाएं डाली हैं और दस्तावेजों का मूल्यांकन किया जा रहा है। उम्मीद है कि जनवरी के पहले सप्ताह तक टेंडर फाइनल हो जाएगा।
जनसंख्या का अनुमान और क्षमता
फिलहाल, नगर निगम शासन को जो रिपोर्ट भेज रहा है, उसमें अनुमानित 1.20 लाख आवारा कुत्तों की संख्या बताई गई है। नए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर में 10 केनेल्स में 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था है, जिन्हें नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन के लिए पकड़ा जाएगा। वहीं, शेल्टर होम में 30 आक्रामक कुत्तों को रखने की व्यवस्था है। यह क्षमता प्रति वर्ष काटे जाने वाले लगभग एक लाख लोगों के आंकड़ों के मुकाबले काफी कम है, जिनमें से 70% मामले शहरी क्षेत्रों से हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों, स्कूलों, खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि, मेरठ में इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। पीएल शर्मा जिला अस्पताल, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, भैंसाली बस अड्डे सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। नगर निगम का नया सेंटर अभी चालू नहीं हुआ है और पुराने सेंटर में शेल्टर होम की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सार्वजनिक स्थलों पर घूम रहे कुत्ते
सार्वजनिक स्थानों पर घूम रहे आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। अस्पताल, स्कूल, खेल परिसर, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन जैसे स्थानों पर आवारा कुत्तों के झुंड देखे जा सकते हैं। नगर निगम द्वारा इन कुत्तों को पकड़ने या स्थानांतरित करने का कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है, जिसका सीधा असर जनसुरक्षा पर पड़ रहा है।
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