अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Greenland? ट्रंप की दिलचस्पी और आर्कटिक की भू-राजनीति
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसे खरीदने की इच्छा जताई थी। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और विशाल प्राकृतिक संसाधन इसे अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संपत्ति बनाते हैं।
ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच सबसे छोटे समुद्री मार्ग पर स्थित करती है। यह अमेरिका के बैलिस्टिक मिसाइल चेतावनी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाना चाहता है, क्योंकि रूसी नौसेना के जहाज और परमाणु पनडुब्बियां भी इस क्षेत्र से गुजरती हैं। अमेरिका यहां रडार सिस्टम स्थापित करने में भी रुचि रखता है ताकि आर्कटिक में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। नाटो सदस्य देश इस क्षेत्र में अपनी तैनाती बढ़ा रहे हैं, जबकि चीन और रूस भी अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं। ग्रीनलैंड में खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार हैं, हालांकि इन संसाधनों का विकास अभी तक धीमा रहा है।
ऐतिहासिक रूप से, ग्रीनलैंड डेनमार्क का उपनिवेश था और 1953 में उसका औपचारिक क्षेत्र बन गया। 2009 में, इसे स्वायत्तता दी गई, जिसमें जनमत संग्रह के माध्यम से डेनमार्क से स्वतंत्रता घोषित करने का अधिकार भी शामिल था। 1951 के एक समझौते के तहत, अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने का अधिकार मिला था। डेनमार्क ने यह व्यवस्था इसलिए स्वीकार की थी क्योंकि उसके पास ग्रीनलैंड की रक्षा करने की क्षमता नहीं थी और नाटो के माध्यम से उसे अमेरिका की सुरक्षा गारंटी मिली हुई थी।
ग्रीनलैंड के अधिकांश नागरिक स्वतंत्रता के पक्ष में हैं, लेकिन वे जल्दबाजी नहीं करना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि डेनमार्क से तुरंत आजादी मांगने पर स्थिति बिगड़ सकती है और ग्रीनलैंड सीधे अमेरिका के निशाने पर आ सकता है। यदि ग्रीनलैंड स्वतंत्र हो जाता है, तो वह अमेरिका का हिस्सा बने बिना भी उसके साथ जुड़ सकता है।
