यूरोप में ‘Raccoon roundworm’ का खतरा, 9 देशों में फैला यह परजीवी इंसानों के लिए क्यों खतरनाक?
गोएथे यूनिवर्सिटी फ्रैंकफर्ट के नेतृत्व में किए गए एक हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि यूरोप के कई हिस्सों में ‘Raccoon roundworm’ (Baylisascaris procyonis) परजीवी का प्रसार तेजी से बढ़ा है। यह परजीवी अब 9 यूरोपीय देशों में फैल चुका है, जिसमें जर्मनी इसका मुख्य केंद्र बना हुआ है।
यह परजीवी मूल रूप से उत्तरी अमेरिका से 1900 के दशक की शुरुआत में रैकून के साथ यूरोप आया था। रैकून इसके प्राथमिक मेजबान हैं, लेकिन यह इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह परजीवी इंसानों में ‘लार्वा माइग्रेंस’ नामक बीमारी का कारण बन सकता है, जिसमें लार्वा शरीर के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
इंसानों में संक्रमण तब होता है जब वे दूषित मिट्टी, पानी या वस्तुओं से परजीवी के अंडे निगल लेते हैं। यह संक्रमण अक्सर रैकून के मल से होता है। यह परजीवी बेहद खतरनाक है क्योंकि रैकून की आंतों में परिपक्व कीड़े प्रतिदिन 1,80,000 अंडे उत्पन्न करते हैं। ये अंडे दो सप्ताह के भीतर संक्रामक लार्वा में विकसित हो जाते हैं और कई वर्षों तक पर्यावरण में जीवित रह सकते हैं।
अध्ययन की पहली लेखिका ऐनी स्टेनहॉफ ने चेतावनी दी है कि छोटे बच्चे विशेष रूप से असुरक्षित होते हैं। यदि लार्वा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में प्रवेश कर जाते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उत्तरी अमेरिका में इस संक्रमण के कारण कई बार अपरिवर्तनीय न्यूरोलॉजिकल क्षति या मृत्यु भी हो चुकी है।
वर्तमान में, यूरोप में इस परजीवी के संक्रमण की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं है। इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे होने के कारण अक्सर गलत निदान हो जाता है। यूरोप में विशिष्ट परजीवी परीक्षणों की कमी है; वर्तमान में केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में ही निश्चित निदान उपलब्ध हैं।
