बांग्लादेश में ‘विद्रोही’ नेता शरीफ उस्मान हादी को राष्ट्रीय कवि के बगल में दफनाया गया, क्यों? (Bangladesh politics)
बांग्लादेश में विद्रोही नेता शरीफ उस्मान हादी को राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के बगल में दफनाया गया है। 1976 में नजरुल इस्लाम के निधन के लगभग 50 साल बाद, हादी को ढाका विश्वविद्यालय मस्जिद के पास दफनाया गया। शनिवार को हादी के अंतिम संस्कार के दौरान ढाका में लाखों लोग उमड़ पड़े। यह घटना बांग्लादेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहां हादी को नजरुल इस्लाम के “विद्रोही” (Bidrohi) कवि के रूप में देखा जा रहा है।
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान उभरे ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे। वह हसीना सरकार के मुखर आलोचक थे और अक्सर भारत के प्रभाव के खिलाफ बोलते थे। ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने जा रहे हादी को 12 दिसंबर को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी थी। बाद में सिंगापुर के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।
हादी की हत्या के बाद, छात्रों के बीच उन्हें “विद्रोही” का दर्जा दिया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में हादी को नजरुल इस्लाम की प्रसिद्ध कविता “विद्रोही” की पंक्तियाँ पढ़ते हुए देखा गया था। इस कविता में तूफान, आंधी और मृत्यु के नृत्य का वर्णन है, जिसे हादी ने अपनी रैलियों में इस्तेमाल किया था। कई लोग हादी को नजरुल इस्लाम की विरासत का उत्तराधिकारी मान रहे हैं।
हादी की मौत के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी। भीड़ ने सांस्कृतिक केंद्रों और शेख मुजीबुर रहमान के घर पर हमला किया। कई शहरों में भारतीय राजनयिक मिशनों को भी निशाना बनाया गया और भारत विरोधी नारे लगाए गए। यह हिंसा ऐसे समय में हुई है जब बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने वाले हैं। वर्तमान मुहम्मद यूनुस प्रशासन के तहत हुई यह घटना देश के राजनीतिक माहौल में तनाव को दर्शाती है।
