बांग्लादेश: Sharif Osman Hadi को Nazrul Islam के पास क्यों दफनाया गया? Dhaka में हिंसा और anti-India slogans
बांग्लादेश में राजनीतिक तनाव के बीच, शेख हसीना विरोधी आंदोलन के प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी को राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम की कब्र के पास दफनाया गया है। हादी की हत्या के बाद ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा भड़की, जिसमें लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। यह घटना आगामी फरवरी 2026 के आम चुनावों से ठीक पहले हुई है।
हादी, जो ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता थे, ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी जिसने शेख हसीना की सरकार को गिरा दिया था। 32 वर्षीय हादी भारत के प्रभाव और हसीना की अवामी लीग के मुखर आलोचक थे। वह अक्सर अपने भाषणों में anti-India rhetoric का इस्तेमाल करते थे।
12 दिसंबर को ढाका-8 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाले हादी पर अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला किया था। हमले के बाद उन्हें सिंगापुर ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी हत्या से एक दिन पहले ही चुनाव आयोग ने फरवरी 2026 में चुनाव की घोषणा की थी।
हादी की मौत के बाद ढाका में हिंसा भड़क उठी। भीड़ ने सांस्कृतिक केंद्रों और शेख मुजीबुर रहमान के घर पर हमला किया। भारतीय राजनयिक मिशनों को भी निशाना बनाया गया और anti-India slogans लगाए गए। यहां तक कि मीडिया संगठनों पर भी हमले हुए, भले ही वे हसीना सरकार के आलोचक थे।
हादी को नजरुल इस्लाम के पास दफनाए जाने को प्रतीकात्मक रूप से देखा जा रहा है। हादी अपनी रैलियों में नजरुल की प्रसिद्ध कविता ‘विद्रोही’ का पाठ करते थे। छात्रों के बीच उन्हें ‘नया बांग्लादेश’ का ‘विप्लवी’ कहा जा रहा है, जो उन्हें नजरुल के विद्रोही विरासत का उत्तराधिकारी मानता है।
