UGC, AICTE, NCTE की छुट्टी! कैबिनेट ने दी भारत के सबसे बड़े शिक्षा सुधार बिल को मंजूरी, जानें क्या बदलेगा
भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में दशकों बाद सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव होने जा रहा है। केंद्रीय कैबिनेट ने एक ऐतिहासिक बिल को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग), AICTE (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) और NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) जैसे कई नियामकों को खत्म कर दिया जाएगा। अब इन सभी की जगह एक एकल, शक्तिशाली नियामक ‘विकसित भारत शिक्षा अधिक्षण आयोग’ लेगा।
यह प्रस्तावित कानून, जिसे पहले Higher Education Commission of India (HECI) बिल के नाम से जाना जाता था, अब ‘विकसित भारत शिक्षा अधिक्षण बिल’ बन गया है। शुक्रवार को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित यह बिल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के एक प्रमुख दृष्टिकोण को पूरा करता है: एक ऐसे क्षेत्र को सुव्यवस्थित करना जो वर्तमान में कई नियामकों द्वारा शासित है जिनके कार्य अक्सर ओवरलैप होते हैं।
नई प्रणाली के तहत, यह आयोग उच्च शिक्षा में नियमन, मान्यता और पेशेवर मानकों को निर्धारित करने का काम संभालेगा। हालांकि, मेडिकल और लॉ कॉलेज इसके दायरे से बाहर रहेंगे। दिलचस्प बात यह है कि फंडिंग (वित्तपोषण) – जिसे चौथा स्तंभ माना जाता है – फिलहाल नए नियामक के दायरे में नहीं आएगी और प्रशासनिक मंत्रालय के पास ही रहेगी। जब तक सरकार बाद में एक अलग Higher Education Funding Authority नहीं बनाती, तब तक शिक्षा मंत्रालय का उच्च शिक्षा विभाग ही फंडिंग की देखरेख करेगा।
दशकों से, भारत का उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र कई एजेंसियों के बीच बंटा हुआ था। NEP-2020 ने नियामक प्रणाली को ‘पूरी तरह से ओवरहाल की आवश्यकता’ वाला बताया था, जिसमें अलग-अलग भूमिकाओं को संभालने के लिए विशिष्ट, सशक्त निकायों की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। 2018 में HECI बिल का मसौदा जारी होने के साथ ही एकल नियामक बनाने के प्रयास शुरू हो गए थे, लेकिन 2021 में धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री बनने के बाद इसमें तेजी आई। कैबिनेट की मंजूरी के साथ, ‘विकसित भारत शिक्षा अधिक्षण आयोग’ भारतीय उच्च शिक्षा के भविष्य को नया आकार देने के एक कदम और करीब आ गया है।
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