इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति की पुनर्नियुक्ति का रास्ता साफ, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी; 70 साल तक पद पर रहने का नियम लागू
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कुलपति की पुनर्नियुक्ति अब संभव होगी। 2010 में कार्यपरिषद ने कुलपति की अधिवर्षिता आयु 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने और पुनर्नियुर्नियुक्ति की पात्रता जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया था, जिसे अब विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्ष और राष्ट्रपति ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। विश्वविद्यालय अधिनियम-2005 के परिनियम-2 के खंड (4) में किए गए संशोधन को लेकर कुलसचिव आशीष खरे द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना भी जारी कर दी गई है।
इससे पहले परिनियम में कुलपति को पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं माना जाता था, लेकिन नए संशोधन से यह पात्रता मिल गई है। यह संशोधन भारत सरकार के राजपत्र में 27 नवंबर, 2025 को प्रकाशित अधिसूचना के माध्यम से प्रभावी हुआ है। इस बदलाव के बाद कुलपति अपना पद ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पद पर रह सकेंगे और पुनर्नियुर्नियुक्ति के लिए भी पात्र होंगे।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने 30 नवंबर 2020 को पदभार ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल 29 नवंबर 2025 को पूरा हो रहा था। ऐसे में 27 नवंबर को जारी अधिसूचना के आधार पर ही उनको एक्सटेंशन मिला था। इवि की जनसंपर्क अधिकारी प्रो. जया कपूर ने बताया कि विश्वविद्यालय को स्टेच्यूट दो (चार) में संशोधन की पुष्टि प्राप्त हुई है।
