मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, ‘टाइगर आउटसाइड प्रोजेक्ट’ शुरू’
देश में वन्यजीवों की तेजी से बढ़ती आबादी और मानव के साथ उनके बढ़ते संघर्ष को थामने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इनके बेहतर प्रबंधन में जुट गया है। इस बीच बाघों के प्रबंधन को लेकर ‘टाइगर आउटसाइड प्रोजेक्ट’ नाम से एक नई मुहिम शुरू की है। जिसमें बाघ अभयारण्यों के कोर जोन से बाहर रहने वाले बाघों को अब वापस कोर जोन में लाया जाएगा।
हालांकि इससे पहले अभयारण्य के कोर जोन में उनके पसंदीदा भोजन की उपलब्धता को जांचा जाएगा। यदि नहीं होगी तो उसकी पूर्ति की जाएगी। माना जाता है कि बाघ अक्सर अभयारण्य के कोर जोन में भोजन की कमी होने पर या पसंद के भोजन की तलाश में बफर जोन में आते हैं। जहां पालतू पशुओं को आसानी से शिकार बना लेते हैं।
यह पहल तब की गई है, जब सर्वेक्षण के दौरान पाए जाने वाले कुल बाघों में से 40 प्रतिशत से अधिक अभयारण्यों के बफर जोन में पाए जा रहे हैं। जो अभयारण्य का बाहरी क्षेत्र होता है। जहां मानवीय गतिविधियां संचालित होती हैं। ऐसे में यहां अक्सर दोनों के बीच संघर्ष की स्थिति दिखाई देती है।
बाघों व मानव के बीच इस संघर्ष की स्थिति यह है कि पिछले पांच सालों में यानी 2021 से सितंबर 2025 तक करीब 350 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं पांच सालों में अलग-अलग कारणों से करीब 650 बाघों की भी मौत हो चुकी है। यह स्थिति तब है जब देश के करीब 58 अभयारण्यों में मौजूदा समय में 3682 से अधिक बाघ होने का अनुमान है।
मंत्रालय के मुताबिक बाघों को बफर जोन से कोर जोन में लाने की पहल मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड के कुछ चुनिंदा बाघ अभयारण्यों में शुरू हो चुकी है। जल्द ही इन्हें देश के दूसरे अभयारण्यों में भी अपनाया जाएगा।
