दिल्ली के 6 ICU अस्पतालों में फर्जी फायर डोर लगाने का खुलासा, मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर कंपनी ब्लैकलिस्ट
दिल्ली के छह नए आईसीयू अस्पतालों में नकली फायर डोर लगाने का मामला सामने आया है। सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कंपनी को दो साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की सतर्कता के चलते नए आइसीयू अस्पतालों में अग्निरोधी दरवाजे लगाने के मामले में बड़ा घोटाला होते-होते बच गया।
दिल्ली सरकार की सात नए आइसीयू अस्पताल बनाने की योजना है, जिसमें 6836 बेड की सुविधा होगी। इनमें से किराड़ी को छोड़कर छह अस्पताल का काम साल 2020-21 में शुरू किया गया था। लगभग सभी अस्पतालों का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। शालीमार बाग, सुल्तानपुरी, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, सरिता विहार और रघुवीर नगर आईसीयू अस्पताल में ठेकेदार को नान इन्सुलेटेड मेटल फायर डोर लगाने का काम दिया गया था। ये दरवाजे अग्निरोधी होते हैं, ताकि आग लगने पर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ठेकेदार ने दरवाजे भी उपलब्ध करा दिए और उन्हें अस्पतालों में लगा भी दिया। लेकिन, जब दरवाजों की गुणवत्ता जांच की गई तो पता चला कि एजेंसी ने जो दरवाजे लगाए हैं वह अग्निरोधी नहीं हैं। इनकी गुणवत्ता भी खराब है। दरवाजों पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जो स्टिकर लगे होते है, वह भी उन पर मौजूद नहीं थे। अफसरों का कहना है कि टेंडर की शर्तों में भी इसी तरह के दरवाजे का जिक्र किया गया है, लेकिन एजेंसी ने धोखाधड़ी की और घटिया किस्म के दरवाजे आपूर्ति कर दिए।
विभाग ने कंपनी को दो साल के लिए काली सूची में डाल दिया है। इस दौरान कंपनी लोक निर्माण विभाग में कोई भी काम नहीं कर सकेगी। इसके साथ ही कंपनी के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है और उसके खिलाफ थाने में शिकायत दी गई है। इस मामले की अब गंभीरता से जांच के आदेश दिए गए हैं।
इन सात अस्पतालों का निर्माण उस समय कोरोना महामारी को देखते हुए शुरू कराया गया था। उस समय की आप सरकार ने दावा किया था कि 6 माह के अंदर अस्पताल तैयार हो जाएंगे। मगर यह पांच साल बाद भी तैयार नहीं हो सके हैं। इन्हें लेकर शुरू से विवाद इसलिए रहा कि जिस अधिकारी ने जिस दिन इन सात अस्पतालों का काम कंपनियों को देने का वर्क अवार्ड किया, वह उसी दिन सेवानिवृत्ति होने वाला था। उस समय की भारतीय जनता पार्टी ने इसे लेकर सवाल उठाया था और इस मामले की अभी एसीबी जांच चल रही है।
