कश्मीर से कन्याकुमारी तक 4000 KM की पदयात्रा, गौरव त्यागी ने जगाई शुद्ध भोजन की अलख
किसान का बेटा निकला तो अनाज शुद्ध करने की मुहिम लेकर… और पहुंच गया कश्मीर से कन्याकुमारी तक। उत्तर प्रदेश के मूल निवासी गौरव त्यागी द्वारा शुरू की गई ‘ भारत अन्नशुद्धि पदयात्रा’ कन्याकुमारी में ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुई। 26 जून को श्रीनगर के लाल चौक से प्रारंभ हुई यह यात्रा कृषि, खाद्य शुद्धता और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का देशव्यापी अभियान बन गई।
लगभग 4,000 किलोमीटर की यह पदयात्रा 160 दिन में पूरी हुई, जिसके दौरान गौरव त्यागी रोजाना 30 से 32 किलोमीटर पैदल चले और गांवों-शहरों में किसानों, युवाओं और नागरिकों से संवाद स्थापित करते हुए आगे बढ़ते रहे। गौरव की इस यात्रा का उद्देश्य लोगों को रसायन-मुक्त भोजन अपनाने और किसानों को जैविक खेती के साथ अपने उत्पाद सीधे बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रेरित करना था।
यात्रा के दौरान एक लाख से अधिक लोग व्यक्तिगत रूप से जुड़े जिनमें करीब 60 हजार छात्र-युवा, 40 हजार से अधिक किसान और लगभग 10 से 15 हजार नागरिक शामिल रहे। कई स्थानों पर जागरूकता सभाएं, कृषक संवाद, स्कूल कार्यक्रम और समाजिक चर्चाएं आयोजित की गईं। गौरव ने हजारों बच्चों को जंक फूड छोड़ने और पौष्टिक भोजन अपनाने की शपथ दिलाई।
मूल रूप से हापुड़ जिले के हैदरपुर गांव के निवासी गौरव त्यागी के जीवन का यह प्रयास यूं ही नहीं शुरू हुआ। एमसीए की पढ़ाई के दौरान उन्हें इम्यून थ्राम्बोसाइटोपेनिक पुरपुरा (आईडीपी) बीमारी का सामना करना पड़ा। इसी दौरान चिकित्सकीय सुझाव में उन्होंने आर्गेनिक भोजन अपनाया और स्वयं स्वास्थ्य सुधार अनुभव किया। इसके बाद पिता मुकेश त्यागी के साथ आर्गेनिक खेती शुरू की, ‘शुद्धग्राम’ ब्रांड बनाया और आनलाइन माध्यम से अनाज ग्राहकों तक पहुंचाना प्रारंभ किया। अब यह विचार उन्होंने पूरे देश के किसानों तक पहुंचाने का संकल्प लिया कि किसान अपनी उपज खुद बेचें, तभी असली लाभ मिलेगा। उनका उद्देश्य शुद्ध अन्न, स्वस्थ भारत और सशक्त किसान बनाने में योगदान देने का है।
