तंबाकू नियंत्रण पर एम्स का बड़ा फैसला, दो संगठनों के साथ मिलकर करेगा शोध; पूर्वांचल को मिलेगा लाभ
एम्स ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए दो संगठनों के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते से तंबाकू नियंत्रण, पर्यावरणीय स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम जैसे क्षेत्रों में सुधार होगा। इसका लाभ पूर्वांचल और पूरे देश की जनता को मिलेगा।
गोरखपुर एम्स ने तंबाकू नियंत्रण और इससे जुड़े विभिन्न शोध व कार्यक्रम के लिए कैम्पेन फार टोबैको-फ्री किड्स (सीटीएफके) और ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इन्क्यूबेटर (जीएचएआइ) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। एम्स प्रशासन का मानना है कि तंबाकू नियंत्रण, रोग नियंत्रण, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण और एक स्वास्थ्य की पहल को इस कार्यक्रम से नया आयाम मिलेगा।
एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डा. विभा दत्ता ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान, नीति समर्थन और स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साझेदारी तंबाकू नियंत्रण, पर्यावरण एवं जलवायु-स्वास्थ्य विश्लेषण तथा बहु-विषयक रोग रोकथाम प्रयासों में एम्स की भूमिका को और मजबूत करेगी। डीन रिसर्च डा. आनंद मोहन दीक्षित ने कहा कि एम्स गोरखपुर लगातार ऐसे सार्थक सहयोगों को बढ़ावा दे रहा है, जो हमारे सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान ढांचे को मजबूत बनाते हैं।
समझौता ज्ञापन में महत्वपूर्ण तथ्य सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन प्रतिषेध तथा व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण विनियमन) की धारा पांच व छह के प्रभाव का आकलन करना है। धारा पांच में तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाया गया है। धारा छह में 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों के सौ गज के दायरे में बिक्री पर भी रोक है। इन धाराओं का उल्लंघन करने पर जुर्माना या कारावास हो सकता है।
