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अररिया की विवाहिता को अगवा कर दिल्ली ले गए, एक महीने तक बनाया बंधक, धर्म बदलने का दबाव और बच्चे को जान से मारने की धमकी!

By Dec 8, 2025

बिहार के अररिया जिले से एक विवाहिता के साथ हुई दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां उसे अगवा कर एक महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उसे न केवल शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई, बल्कि धर्म परिवर्तन का दबाव भी बनाया गया और उसके बच्चे को जान से मारने की धमकी भी दी गई। इतना ही नहीं, पीड़िता को विदेश में बेचने की खौफनाक साजिश भी रची गई थी।

फारबिसगंज थाना क्षेत्र की इस महिला को पहले भीमपुर, सहरसा और फिर दिल्ली सहित कई इलाकों में बंधक बनाकर रखा गया था। पीड़िता ने किसी तरह अपनी जान बचाकर भागने में सफलता पाई और घर पहुंचकर अपने पति को आपबीती सुनाई। इसके बाद हिम्मत जुटाकर महिला ने पति के साथ अररिया कोर्ट पहुंचकर सात लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया है।

पीड़िता ने नरपतगंज थाना क्षेत्र के पलासी गांव निवासी मो. आलम आजाद सहित कुल सात लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दर्ज परिवाद पत्र के अनुसार, उसे धोखे से अगवा किया गया, महीनों तक बंधक बनाकर पीटा गया, और हिंदू से मुस्लिम धर्म परिवर्तन के लिए लगातार दबाव डाला गया। जब उसने विरोध किया, तो उसे उसके बच्चे को जान से मारने की धमकी दी गई। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि आरोपियों ने उसे विदेश में बेचने की भी नाकाम कोशिश की थी।

पीड़िता ने बताया कि आरोपी मो. आलम आजाद ने उसे फोन कर झांसा दिया था कि उसके पति ने बुलाया है। उसके विश्वास में आते ही आलम आजाद ने उसे जबरन अपनी कार में बैठाकर सुपौल जिले के वीरपुर प्रखंड के भीमपुर गांव ले गया। वहां कई दिनों तक बंधक रखने के बाद उसे अररिया लाया गया, जहां जबरदस्ती एक कागज पर हस्ताक्षर करवाकर नोटरी कराई गई। पीड़िता का आरोप है कि इस कागज का इस्तेमाल उसे विदेश में बेचने की नीयत से किया जाना था। इसके बाद उसे फिर भीमपुर और फिर आलम के पैतृक गांव पलासी में कैद रखा गया।

पलासी में आलम के स्वजनों ने मिलकर उसे आपत्तिजनक खाद्य पदार्थ खिलाने और धर्म परिवर्तन करने का लगातार दबाव बनाया। विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटा गया। अंत में आरोपी आलम आजाद उसे सहरसा से ट्रेन द्वारा दिल्ली ले गया, जहां एक किराए के मकान में उसे कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा और उसके बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

लंबे समय तक कैद और असहनीय उत्पीड़न झेलने के बाद, पीड़िता किसी तरह अपने घर वापस लौटने में कामयाब हुई। शुरुआत में डर और सामाजिक बदनामी के कारण वह चुप रही, लेकिन अब उसने हिम्मत जुटाकर अपने पति के साथ मिलकर न्याय के लिए न्यायालय की शरण ली है। परिवाद में मो. आलम आजाद के अलावा उसके स्वजनों और सहयोगियों समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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