पीलीभीत में अब सड़कों पर ‘तीसरी आंख’ रखेगी नजर! 13 स्थानों पर लगेंगे ANPR, स्पीड कैमरे, दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम
पीलीभीत जिले में सड़क सुरक्षा को ‘हाई-टेक’ कवच मिलने जा रहा है। सड़कों को सुरक्षित बनाने और सड़क हादसों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से जिले के 13 चिन्हित स्थानों पर ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) और स्पीड कैमरे जैसे आधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे। यह पहल दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जिले में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए मार्गों पर इन हाईटेक उपकरणों की स्थापना की कवायद तेजी से शुरू हो गई है। परिवहन विभाग ने स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट फॉर कैपिटल इंवेस्टमेंट योजना के तहत नगर विकास विभाग, पुलिस, परिवहन विभाग, परिवहन निगम, लोक निर्माण विभाग, यूपीडा, यीडा आदि के सहयोग से इन उपकरणों को जल्द स्थापित करने की योजना बनाई है। इन 13 स्थानों का चयन वहां अधिक हादसों के होने की आशंका के आधार पर किया गया है।
एआरटीओ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत हाई रिस्क कारीडोर, हाई डेंसिटी कारीडोर और क्रिटिकल जंक्शन पर इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट डिवाइसेज स्थापित किए जाने हैं। हाई रिस्क कारीडोर के तहत उन सड़कों के एक किमी लंबाई के हिस्सों को चिन्हित किया जाएगा, जहां बीते तीन वर्षों में न्यूनतम तीन हादसे हुए हैं। इसी तरह, शहरी और ग्रामीण इलाकों की उन सड़कों को भी चुना जाएगा, जहां तीन वर्षों में न्यूनतम दो हादसे हुए हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इन उपकरणों की मदद से वाहन चालकों की गति, लाल बत्ती पार करने जैसी गलतियों की तुरंत पहचान हो सकेगी और यातायात नियमों के पालन को सख्ती से सुनिश्चित किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इससे न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि ट्रैफिक अनुशासन भी बेहतर होगा। स्कूलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में इन उपकरणों से पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
प्रमुख जिला मार्ग और अन्य जिला मार्ग पर भी यही मानक लागू होगा। इसके अलावा, स्कूल और अन्य शैक्षिक संस्थानों के आसपास की सौ मीटर की सड़क भी इसके दायरे में आएगी। साथ ही, जिला सड़क सुरक्षा समिति द्वारा नामित सड़कें भी हाई रिस्क कारीडोर के तहत शामिल की जाएंगी। वहीं, उच्च घनत्व (हाई डेंसिटी) वाले कारीडोर के तहत ऐसे स्थान और सड़कें चिन्हित की जाएंगी, जहां यातायात उल्लंघन (ओवर स्पीडिंग, रेड लाइट जंपिंग, लेन अनुशासनहीनता, क्रॉस पेडेस्ट्रियन मूवमेंट) अधिक होता है।
इन डिवाइसों का मुख्य लक्ष्य पैदल यात्री, दोपहिया वाहन और साइकिल चालकों की हादसों में होने वाली मौतों को रोकना है। वहीं, क्रिटिकल जंक्शन के तहत तीनों तरह की सड़कों पर स्थित ऐसे जंक्शन को शामिल किया जाएगा, जहां तीन वर्षों में न्यूनतम एक दुर्घटना हुई है।
स्थापित किए जाने वाले प्रमुख उपकरणों में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरा, स्पीड कैमरा, एआई बेस्ड वॉयलेशन डिटेक्शन (मोबाइल का इस्तेमाल, हेलमेट धारण नहीं करना, गलत दिशा में वाहन चलाना), रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्टर, डिजिटल साइनेज, वेरिएबल मैसेज साइन, बॉडी वार्न कैमरा, सीसीटीवी, डैशबोर्ड कैमरा, इंटरसेप्टर विद स्पीड गन और वे-इन-मोशन जैसे अत्याधुनिक उपकरण शामिल हैं।
