वाराणसी में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर शिकंजा, बनेगा डिटेंशन सेंटर
लखनऊ में बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय के सदस्यों के सामने आने के बाद, प्रदेश सरकार ने सभी मंडल मुख्यालयों पर डिटेंशन सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में, वाराणसी में भी अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के लिए एक डिटेंशन सेंटर जल्द ही तैयार किया जाएगा। वाराणसी पुलिस ने शहर में ऐसे अवैध प्रवासियों की तलाश तेज कर दी है, ताकि उनकी पहचान कर उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजा जा सके।
पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत, शहर के विभिन्न इलाकों, विशेषकर रेलवे लाइन के आसपास बसी बस्तियों, सड़क किनारे लगी झुग्गियों और अन्य संदिग्ध स्थानों पर रहने वाले लोगों के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल के अनुसार, इस अभियान के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से या गलत दस्तावेजों के आधार पर शहर में रह रहा पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे विशेष जांच दस्ते बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जंसा थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि रविवार को झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों का सत्यापन किया गया। ऐसे लोगों को, जिन पर संदेह है, तत्काल अपने गृह जनपद लौटने का निर्देश दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, मकान मालिकों को भी यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने किराएदारों का सत्यापन अवश्य कराएं। यह अभियान शासन के निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वाराणसी में अवैध रूप से निवास कर रहे विदेशियों की पहचान करना और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत डिटेंशन सेंटर में स्थानांतरित करना है। पुलिस प्रशासन ने इस दिशा में सक्रियता दिखाते हुए जांच प्रक्रिया को गति दी है। यह कदम न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय निवासियों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा। पुलिस ने स्थानीय समुदाय से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है, ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान में मदद मिल सके।
