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आयुष विश्वविद्यालय बनेगा औषधीय निर्माण का केंद्र, आत्मनिर्भरता पर जोर

By Oct 27, 2025

गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय औषधीय निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में जहां आठ हजार से अधिक औषधीय पौधे रोपित किए गए हैं, वहीं इसकी फार्मेसी में जड़ी-बूटियों से दवाएं बनाने का कार्य प्रारंभ हो चुका है।

विश्वविद्यालय का लक्ष्य औषधियों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है। इसके लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस पहल से न केवल विश्वविद्यालय स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाएगा, बल्कि किसानों को भी औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भटहट स्थित विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के आठ हजार से अधिक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इनमें अरंडी, अर्क, वट जैसे पौधे शामिल हैं, जिनके पत्तों का उपयोग पंचकर्म चिकित्सा में किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, फार्मेसी में बाहर से मंगाई गई जड़ी-बूटियों की सहायता से भी औषधियां तैयार की जा रही हैं।

कुलपति डा. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि परिसर में लगाए गए पौधों को आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। इन पौधों की पहचान सुगम बनाने के लिए उनके हिंदी, संस्कृत और वैज्ञानिक नामों के साथ आईडी कार्ड लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि औषधीय गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इन पौधों की देखरेख वैज्ञानिक पद्धति से की जा रही है।

आयुष विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य औषधियों के निर्माण में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसी कड़ी में वचा, विजयसार, गिलोय और अश्वगंधा जैसी महत्वपूर्ण औषधियों के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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