1971 की जीत का जश्न: पूर्व सैनिक अधिकारियों ने साझा की नेवी की गौरव गाथा
कासगंज। भारतीय नौसेना दिवस के उपलक्ष्य में जिले के पूर्व सैनिक अधिकारियों ने वर्ष 1971 में पाकिस्तान पर भारत की निर्णायक जीत की गौरवशाली गाथा को स्मरण किया। इस ऐतिहासिक युद्ध में भारतीय नौसेना की अदम्य वीरता और जीत में उसकी अहम भूमिका पर पूर्व सैनिकों ने गहरा गर्व व्यक्त किया।
युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां और युद्धपोत कराची बंदरगाह तक पहुंचने में सफल रहे थे, जिसने पाकिस्तानी सेना के मनोबल को तोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी युद्ध के परिणामस्वरूप पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ। भारतीय सेना के शौर्य के आगे पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण करना पड़ा था।
जिले में उन पूर्व सैनिक अधिकारियों ने, जिन्होंने इस युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया था, अपने युद्ध के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे भारतीय नौसेना ने अपनी रणनीतिक कुशलता और अदम्य साहस से जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर सैनिक कल्याण केंद्र में इस युद्ध में शहीद हुए वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी जगवीर सिंह ने बताया कि भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय वह युद्धपोत ‘निर्भीक’ पर तैनात थे। यह युद्धपोत मिसाइलों और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों से सुसज्जित था। उन्होंने कहा, “इस युद्धपोत के मिशन के लिए तैनात अधिकारियों ने निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।”
सिढ़पुरा निवासी पूर्व चीफ पैटी ऑफिसर दफेदार सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान उनकी तैनाती आईएनएस कर्जन पर थी। यह पनडुब्बी कराची हार्बर को ब्लॉक करने के लिए भेजी गई थी। पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण के बाद, युद्धपोत 22 दिनों के बाद मुंबई लौटा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस युद्ध में नौसेना ने अत्यंत अहम भूमिका निभाई थी।
सैलई निवासी पूर्व चीफ पैटी ऑफिसर अविनाश चंद्र पाराशर ने बताया कि वह 1971 के युद्ध के दौरान नौसेना के युद्धपोत आईएनएस रंजीत पर तैनात थे। इस युद्धपोत को भी कराची हार्बर भेजा गया था। पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण के बाद, वे 16 दिनों के बाद अपने देश लौटे। इन पूर्व सैनिकों के अनुभव तत्कालीन नौसेना की क्षमता और वीरता का प्रमाण हैं, जिसने देश की विजय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
