वृद्धावस्था में गिरने से बचाव: डॉक्टर की सलाह, स्वस्थ जीवन का आधार
एक अनुभवी चिकित्सक ने साझा किया है कि बढ़ती उम्र के साथ स्वस्थ और स्वतंत्र जीवन जीना कैसे संभव है। उन्होंने बताया कि यह केवल भाग्य या आनुवंशिकी का खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन में की गई छोटी-छोटी, सुसंगत पसंदों पर निर्भर करता है, जैसे कि हमारा खान-पान, दवाओं का सेवन और हमारे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल।
डॉक्टर ने अपने दशकों के शोध और रोगियों के साथ अपने अनुभव के आधार पर बताया कि कई बुजुर्ग अक्सर पांच या उससे अधिक दवाएं प्रतिदिन लेते हैं, जिसे पॉली फार्मेसी कहा जाता है। हालांकि हर दवा की कभी न कभी आवश्यकता रही होगी, लेकिन समय के साथ इन दवाओं का संयोजन चक्कर आना, गिरना, कब्ज, भ्रम और दवा पारस्परिक क्रियाओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।
इसलिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हर छह महीने में अपनी सभी दवाओं की समीक्षा अपने डॉक्टर या जराचिकित्सा विशेषज्ञ (geriatrician) से अवश्य करवाएं। डॉक्टर के पास जाते समय अपनी सभी दवाओं की एक सूची साथ ले जाएं और यह तीन प्रश्न पूछें: ‘क्या मुझे अभी भी इसकी आवश्यकता है?’, ‘क्या खुराक कम की जा सकती है?’, और ‘क्या कोई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध है?’ कभी-कभी, केवल एक दवा को बंद करने या उसकी खुराक को समायोजित करने से व्यक्ति की सतर्कता, संतुलन और भूख में सुधार हो सकता है। दवाओं की यह नियमित समीक्षा स्वस्थ जीवन के वर्षों को बढ़ाने का एक सरल तरीका है।
इसके अतिरिक्त, 50 वर्ष की आयु के बाद, हर साल हमारी मांसपेशियों के द्रव्यमान में स्वाभाविक रूप से लगभग 1-3% की कमी आती है, जिसे सार्कोपेनिया कहा जाता है। मांसपेशियों की कमजोरी के कारण चलने की गति धीमी हो जाती है, संतुलन बिगड़ जाता है और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति से बचने के लिए, पर्याप्त प्रोटीन का सेवन और नियमित व्यायाम, विशेष रूप से शक्ति प्रशिक्षण (strength training), मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकता है।
