0

सब्जियों के दाम आसमान पर, रसोई का बजट बिगड़ा, थाली से गायब हरी सब्जियां

By Dec 3, 2025

सिवान में पिछले पंद्रह दिनों से सब्जियों के भावों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने आम आदमी के रसोई का बजट बिगाड़ कर रख दिया है। सब्जियों के दाम में आई इस उछाल ने खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कई घरों से हरी सब्जियां गायब होने लगी हैं, जो पहले थाली का अहम हिस्सा हुआ करती थीं।

शहर की स्थानीय सब्जी मंडियों में सब्जियों के दाम इतने बढ़ गए हैं कि ग्राहक दाम सुनकर ही खरीदारी से किनारा कर लेते हैं। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, सब्जियों की आवक में भारी कमी आई है, जिसके कारण दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा, वर्तमान में चल रहे शादी-ब्याह के सीजन के कारण सब्जियों की मांग बढ़ी हुई है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर और बढ़ गया है।

वर्तमान में बाजार में लौकी 50 रुपये प्रति किलो, बैंगन 60 रुपये किलो, करेला 100 रुपये प्रति किलो, मटर 120 रुपये प्रति किलो, सेम 100 रुपये प्रति किलो, फूलगोभी 50 से 80 रुपये किलो, पत्तागोभी 40 से 60 रुपये किलो, परवल 100 रुपये किलो, टमाटर 80 रुपये किलो, हरी मिर्च 80 से 90 रुपये किलो, भिंडी 80 रुपये किलो, पालक 60 रुपये प्रति किलो, नया आलू 40-50 रुपये प्रति किलो और प्याज 25 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है।

महंगाई का आलम यह है कि कभी मुफ्त में मिलने वाली धनिया पत्ती के लिए भी अब 100 रुपये प्रति किलो तक चुकाने पड़ रहे हैं। इस बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर गृहणियों पर पड़ रहा है, जिन्हें कम बजट में परिवार के लिए खाना बनाना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, आलू, प्याज और टमाटर जैसी आवश्यक सब्जियां भी पिछले एक महीने से महंगी बनी हुई हैं, जिससे घर का बजट संभालना मुश्किल हो गया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जहां पहले 200 से 300 रुपये में पूरे हफ्ते की सब्जी आ जाती थी, वहीं अब उतने पैसों में केवल दो-तीन दिन की ही सब्जी मिल पाती है। सब्जियों के दाम बढ़ने से खुद विक्रेता भी परेशान हैं। एक विक्रेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सब्जियों के दाम में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण उनकी बिक्री पर सीधा असर पड़ा है। ग्राहक दाम पूछकर ही आगे बढ़ जाते हैं, जिससे उनकी कमाई प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आमतौर पर इस मौसम में सब्जियों की भरपूर आवक होती है और दाम कम हो जाते हैं, लेकिन इस वर्ष स्थिति बिल्कुल विपरीत है। थोक बाजार में भी सब्जियां महंगी मिल रही हैं, जिस कारण उन्हें भी ऊंचे दामों पर बेचना पड़ रहा है।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें